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- जीवित गर्भ के अबॉर्शन ऑर्डर पर सुप्रीम कोर्ट हुआ शर्मिंदा सरकार को लगाई फटकार कही यह बात....
Posted by : achhiduniya
11 October 2023
बीते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने इस
दंपति को 26-हफ़्ते के गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी थी, क्योंकि याचिकाकर्ता का
तर्क था कि पहले से दो बच्चों की मां महिला कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और प्रसव
के बाद होने वाले डिप्रेशन से पीड़ित है। मंगलवार को गर्भ को गिरा देने की अनुमति
देने वाले सुप्रीम कोर्ट को इस बात से नाराज़गी थी कि AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट इतनी
देर से क्यों दाखिल की गई और कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि रिपोर्ट पहले
क्यों पेश नहीं की गई थी। दरअसल सरकार की
ओर से एक मेडिकल रिपोर्ट पेश किए जाने के
बाद सुप्रीम कोर्ट ने 26 हफ़्ते के गर्भ को गिरा देने की अनुमति देने वाले
आदेश को
फिलहाल होल्ड पर रख लिया है। मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया था कि भ्रूण में जीवन के लक्षण दिख
रहे हैं और उसके जीवित रहने की संभावनाएं प्रबल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने
आदेश को वापस लेने की सरकार की अर्ज़ी पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह कोई भी नया
आदेश जारी करने से पहले महिला से बात करना चाहती है।
जस्टिस हिमा कोहली ने कहा,हमारे आदेश के बाद ही
क्यों...?
उन्हें इससे पहले क्यों
याद नहीं आया...? कौन-सी अदालत है, जो धड़कते दिल वाले भ्रूण को खत्म करना चाहेगी, निश्चित रूप से हम तो
नहीं,
भगवान के लिए..."महिला ने कहा था कि वह आर्थिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से तीसरे बच्चे को पालने की
स्थिति में नहीं है, क्योंकि अभी उसकी दूसरी
संतान को ही स्तनपान करवाना पड़ता है।
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