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- बेरोजगारी दर और बेरोजगारो पर चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने....
Posted by : achhiduniya
15 November 2023
देश में जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की बेरोजगारी दर छह साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर रही। सरकारी सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया है,भारत की बेरोजगारी दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है और सभी
क्षेत्रों में उद्यमिता सहित श्रम बाजार एक गहरे संरचनात्मक परिवर्तन के दौर से
गुजर रहा है। उच्च शिक्षा प्राप्ति प्रमुख उत्प्रेरक के रूप में उभर रही है। रिपोर्ट
में कहा गया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) और पीएम-स्वनिधि जैसी
योजनाओं के माध्यम से उद्यमिता पर सरकार के जोर से निचले पायदान पर मौजूद लोगों को
समर्थन मिला है। इस वजह से भारत में श्रम बाजार एक संरचनात्मक
परिवर्तन से गुजर
रहा है। बेरोजगारी दर को श्रमबल में बेरोजगार लोगों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित
किया गया है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की ओर से जारी आवधिक
श्रम बल सर्वेक्षण वार्षिक रिपोर्ट 2022-2023 के अनुसार जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए सामान्य स्थिति में बेरोजगारी दर
(यूआर) 2021-22 में 4.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.2 प्रतिशत हो गई। सामान्य स्थिति का मतलब
है कि रोजगार किसी व्यक्ति की स्थिति सर्वेक्षण की
तारीख से पहले के 365 दिन के आधार पर निर्धारित किया गया है।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार
बेरोजगारी दर 2020-21 में 4.2 प्रतिशत, 2019-20 में 4.8 प्रतिशत, 2018-19 में 5.8 प्रतिशत और 2017-18 में छह प्रतिशत थी। समय अंतराल पर श्रम
बल आंकड़े उपलब्ध होने के महत्व को ध्यान में रखते हुए एनएसएसओ ने अप्रैल 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) शुरुआत की थी। रिपोर्ट के अनुसार,ग्रामीण क्षेत्रों में 2017-18 में बेरोजगारी दर 5.3 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 2.4 प्रतिशत
हो गई। शहरी क्षेत्रों के लिए यह 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.4 प्रतिशत हो गई। सर्वेक्षण में सामने आया है कि भारत में पुरुषों में
बेरोजगारी दर 2017-18 में 6.1 प्रतिशत
से घटकर 2022-23 में 3.3 प्रतिशत हो गई।
जबकि महिलाओं में
बेरोजगारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर 2.9 प्रतिशत रही। भारतीय स्टेट बैंक के एक अर्थशास्त्री
ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही,रिपोर्ट में एसबीआई के अर्थशास्त्रियों
ने रोजगार जैसे विषय पर पुराने जमाने की टिप्पणियों की फिर से व्याख्या करने की
वकालत की।



