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- NO STAY ON CAA, 237 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई कही यह बात,सरकार से मांगा जवाब...
Posted by : achhiduniya
19 March 2024
संसद
द्वारा विवादास्पद कानून CAA पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र सरकार ने 11 मार्च को संबंधित नियमों की
अधिसूचना के साथ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त
कर दिया था। इस कानून में 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत
आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को तेजी से भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट में CAA से जुड़ी करीब 237 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन
याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। अदालत ने फिलहाल इसके
क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। जवाब
दाखिल करने के
लिए सरकार को तीन हफ्ते आठ अप्रैल तक का वक्त दिया है। इस
मामले की अगली सुनवाई अब नौ अप्रैल को होगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश
सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त मांगा था,लेकिन शीर्ष अदालत
ने उन्हें केवल तीन हफ्ते का वक्त दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ
से कहा,CAA किसी
भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश
वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र को समय दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2019 में नागरिकता विधेयक को संसद
द्वारा मंजूरी दी गई थी। अब इसके चार साल हो गए।
नोटिफिकेशन अभी जारी किया गया है।
अगर एक बार लोगों को इस कानून के आधार पर नागरिकता मिल गई तो उसे वापस करना
मुश्किल होगा। सिब्बल ने केंद्र द्वारा जारी नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अन्य वकील इंदिरा जय सिंह ने भी CAA पर रोक लगाने और इस मामले को बड़ी
बेंच में भेजने की मांग की थी। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि पहले से जारी आदेश के
मुताबिक असम के मामलों की सुनवाई अलग से की जाएगी। इस बीच याचिकाकर्ताओं के एक
वकील ने कहा कि 6बी (4) कहता है कि CAA असम के कुछ आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।
मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम पूरी तरह बाहर हैं। वहीं
चीफ जस्टिस ने कहा कि पूरा राज्य बाहर नहीं है, बल्कि वो हिस्से जो 6वीं अनुसूची में शामिल हैं, सिर्फ वही इससे बाहर हैं।
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