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- क्यू जन्म के 11 महीने के दौरान भारत में बच्चों की हो रही मौतें….?
Posted by : achhiduniya
20 May 2024
शोधकर्ताओं का
कहना है कि समय के साथ मृत्यु दर का बोझ कम हो गया है। 2016
से 2021
तक कुछ राज्यों और
केंद्रशासित प्रदेशों में सभी स्टेजेस के दौरान मृत्यु दर की स्थिति बिगड़ी है और
अगर ये पैटर्न जारी रहता है तो ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश संयुक्त राष्ट्र
सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को पूरा नहीं कर पाएंगे। जामा नेटवर्क ओपन में रिसर्च
छपी है यह अध्ययन नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे [NFHS] के पांचों रिपोर्ट में दर्ज 5
साल से कम उम्र के
बच्चों की 2.3 लाख से अधिक मौतों के विश्लेषण पर आधारित है। NFHS की
पांचों रिपोर्ट के रिजल्ट 1993,
1999, 2006, 2016 और 2021
में जारी किए गए थे।
अध्ययन के मुताबिक 1993 और 2021
के बीच बच्चों की
मृत्यु में सबसे अधिक कमी देखी गई। जहां 1993
में 1,000
बच्चों पर 33.5
बच्चों की मौत होती
थी वो 2021 में कम होकर 1000
बच्चों पर 6.9
पर आ गई। शोधकर्ताओं
ने बाल मृत्यु दर को चार में बांटा है। अर्ली नियोनेटल यानी बच्चे के जन्म के पहले
7 दिन, लेट नियोनेटल यानी 8-28
दिन,
पोस्ट नियोनेटल 29
दिन से 11
महीने और शिशु 12-59
महीने। उन्होंने
पाया कि अर्ली नियोनेटल में हर 1,000 पर पहले 33.5
मौत होती थी,लेकिन
इसमें कमी आई और ये 20.3 तक पहुंच गई है। लेट नियोनेटल में हर 1,000
पर 14.1
से 4.1
मृत्यु दर में
गिरावट आई है।
नवजात शिशु के बाद हर 1,000 पर 31.0
से 10.8
मृत्यु में मृत्यु
दर में कमी आई। संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी में 2030
तक पहले 5
वर्षों में मृत्यु
दर को कम करके प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 25 मौतें और पहले 28 दिनों में प्रति 1,000
जीवित जन्मों पर 12
मौतों को कम करना
शामिल है। हार्वर्ड, टोरंटो विश्वविद्यालय और आईआईटी मंडी के
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए है। 21 राज्य 2021
में अर्ली नियोनेटल
मृत्यु दर को हर 1000 जन्मों पर 7 तक कम करने के लक्ष्य के पूरा नहीं कर पाए।
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