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- खुद नंगा हो जाना और नाबालिग लड़की के अंडरवियर को उतारता ‘बलात्कार का प्रयास’ नहीं राजस्थान हाईकोर्ट
Posted by : achhiduniya
13 June 2024
राजस्थान हाईकोर्ट
ने 33 साल पुराने एक मामले
में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फैसले में कहा गया कि नाबालिग लड़की के अंडरवियर
को उतारता और खुद नंगा हो जाना एक अलग अपराध श्रेणी में आएगा। इसे ‘रेप का प्रयास’ नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे
अपराध को महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अपराध माना जाएगा। इस तरह का अपराध
आईपीसी की धारा 376 और धारा 511 के दायरे में नहीं आएगा। शिकायतकर्ता ने टोंक जिले के टोडारायसिंह में
पुलिस में शिकायत दी थी कि 9 मार्च, 1991 को उसकी 6 वर्षीय पोती प्याऊ पर पानी पी रही थी। इसी दौरान आरोपी
सुवालाल आया और रेप के इरादे से बच्ची को जबरन पास की धर्मशाला में ले गया। घटना रात 8:00
बजे की बताई गई थी। पुलिस को दी गई
शिकायत में कहा गया था कि जब लड़की ने शोर मचाया, तो गांव के
लोग वहां पहुंचे और पीड़िता को आरोपी
के चंगुल से बचाया। यदि लोग नहीं पहुंचते तो आरोपी पीड़िता के साथ दुष्कर्म की वारदात को
अंजाम दे देता। पहले यह मामला टोंक की जिला अदालत में चला था। कोर्ट ने आरोपी सुवालाल को रेप के प्रयास का
दोषी ठहराया था। आरोपी मुकदमे के दौरान ढाई महीने तक जेल में रहा। अदालत ने आरोपी पर
लगाई गई धाराओं 376/511 में बदलाव किया जिसके तहत ट्रायल कोर्ट ने उसे
दोषी ठहराया था,लेकिन बुधवार को
राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी पर लगी धाराओं 376/511 को धारा 354 में बदल दिया। जस्टिस अनूप कुमार
ढांड की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रेप की कोशिश के अपराध का मतलब है कि
आरोपी ने तैयारी के चरण से आगे बढ़कर काम किया।
मामले में रखे गए
तथ्यों से आईपीसी की धारा 376/511 के तहत अपराध के लिए कोई मामला साबित नहीं किया
जा सकता है। आरोपी याचिकाकर्ता को रेप करने के प्रयास के अपराध का दोषी नहीं
ठहराया जा सकता है। अभियोजन पक्ष पीड़िता की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से बल का
प्रयोग करने का मामला साबित करने में सक्षम रहा है। यह अपराध धारा 354
आईपीसी के तहत आता है, क्योंकि आरोपी तैयारी के चरण से आगे नहीं बढ़
पाया था। फैसला सुनाते हुए जस्टिस ढांड ने कुछ मामलों का भी हवाला दिया। उन्होंने दामोदर
बेहरा बनाम ओडिशा और सिट्टू बनाम राजस्थान राज्य जैसे मामलों का हवाला दिया। इनमें आरोपी ने एक
लड़की को जबरन नंगा किया और उसके विरोध के बावजूद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की
कोशिश की थी।
उक्त दोनों ही मामलों में आरोपी के कृत्य को रेप का प्रयास माना गया था। कोर्ट ने कहा,
रेप के प्रयास के अपराध के लिए तीन चरणों को पूरा होना जरूरी है। पहला चरण जब अपराधी
पहली बार अपराध करने का विचार या इरादा रखता है। दूसरे चरण में अपराधी रेप करने की तैयारी करता
है। तीसरे
चरण में अपराधी वारदात को अंजाम देने के लिए जानबूझकर खुले कदम उठाता है। रेप का प्रयास जैसे
अपराध के लिए, अभियोजन
पक्ष को साबित करना होगा कि अपराधी तैयारी के चरण से आगे निकल गया था
। [मिडीया सभार]



