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नई इनकम टैक्स और पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था में क्या है अंतर...? क्या नए से पुराने मे आ सकते है वापस....?
Posted by : achhiduniya
17 June 2024
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2020 में की गई घोषणा के तहत टैक्स स्लैबों
के अलावा, दोनों ही टैक्स व्यवस्थाओं में सालाना आय ₹5 लाख से कम रह जाने की स्थिति में इन्कम
टैक्स एक्ट की धारा 87ए के तहत टैक्सपेयरों को छूट दी गई थी, जिससे करदाता की समूची टैक्स देनदारी
खत्म हो जाती थी, यानी जिनकी कमाई ₹5 लाख से कम रह जाती थी, उन्हें कोई इन्कम टैक्स नहीं देना
पड़ता था। यहां भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि आय अगर ₹5 लाख से ज़्यादा हो, तो ₹2.5 लाख से ऊपर की समूची रकम पर लागू होने
वाली स्लैब के हिसाब से इन्कम टैक्स चुकाना पड़ता है। भले ही
आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी हो, या नई टैक्स व्यवस्था. लेकिन फिर वर्ष
2023 के बजट में की गई घोषणा के ज़रिये टैक्स स्लैबों के साथ-साथ धारा 87ए के तहत
छूट की सीमा में भी बदलाव किया गया। अब वित्तवर्ष 2023-2024 की ITR फ़ाइल करने जा रहे टैक्सपेयरों को इसका
फ़ायदा मिल सकेगा। उन्हें अब ₹5 लाख के स्थान पर ₹7 लाख तक की आय होने पर टैक्स से पूरी छूट दे दी जाएगी, लेकिन इसका फ़ायदा सिर्फ़ उन्हें
मिलेगा, जो नई टैक्स व्यवस्था अपना लेंगे। पुरानी टैक्स व्यवस्था
में बने रहने वालों को ₹5 लाख से ज़्यादा आय होते ही आयकर चुकाना होगा। एक बात और
ध्यान रखने योग्य है कि यह छूट वित्तवर्ष 2023-24 की आय का हिसाब-किताब करते वक्त यानी ITR फ़ाइल करते वक्त ही दी जाएगी।
वैसे, जो करदाता छोटी बचत योजनाओं में निवेश किया करते हैं या जीवन बीमा पॉलिसियां खरीद चुके हैं और प्रीमियम अदा कर रहे हैं या जिन्होंने पीपीएफ़ खाता खुलवा रखा है या घर के लिए होम लोन लिया है या किराये के मकान में रहकर मकान
किराया भत्ते में HRA Exemption हासिल करते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ही बेहतर बताई जाती है।
मोटे तौर पर कहा जाए, तो जो टैक्सपेयर मानक कटौती, यानी Standard Deduction के अलावा अलग-अलग मदों में कुल मिलाकर ₹3 लाख या
उससे ज़्यादा Exemptions या Deductions हासिल करते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ही बेहतर रहेगी। इसलिए, जब आप ITR, यानी इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करें, तो पूरा हिसाब लगाकर ही फ़ायदेमंद
टैक्स व्यवस्था चुननी चाहिए। अगर किसी टैक्सपेयर ने एक बार New Tax Regime, यानी नई टैक्स
व्यवस्था को चुन लिया, तो फिर वह चाहकर भी Old Tax Regime, यानी पुरानी
टैक्स व्यवस्था को नहीं चुन सकता,लेकिन इस तरह की ख़बरें अफ़वाह ही हैं और पूरी तरह सच नहीं हैं।
असलियत यह है
कि नियमानुसार सिर्फ़ बिज़नेस क्लास टैक्सपेयरजो वेतनभोगी या पेंशनर नहीं हैं, वही एक बार नई टैक्स व्यवस्था चुनने के बाद पुरानी टैक्स
व्यवस्था पर नहीं लौट सकेंगे। वेतनभोगियों, यानी सैलरीड क्लास के लिए नई या पुरानी
टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प हर वर्ष उपलब्ध रहेगा यानी एक बार नई टैक्स व्यवस्था चुनने
के बावजूद वह चाहे, तो अगले साल पुरानी टैक्स व्यवस्था पर लौट सकता है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल, यानी बजट 2023 की स्पीच के दौरान मध्यम वर्ग, यानी मिडिल क्लास को इन्कम टैक्स में राहत देने के लिए ₹7 लाख से कम सालाना आमदनी वाले
टैक्सपेयरों को टैक्स से पूरी तरह छूट दे दी।



