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- जनसंख्या विस्फोट की ओर....
Posted by : achhiduniya
13 July 2024
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत की
जनसंख्या 2060 के दशक की शुरुआत में लगभग 1.7 अरब तक पहुंच जाने का अनुमान है और
इसके बाद इसमें 12 प्रतिशत की कमी आएगी, लेकिन इसके बावजूद यह पूरी शताब्दी के
दौरान विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा। वर्ल्ड पॉपुलेशन
प्रॉस्पेक्ट्स 2024 रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 50-60 वर्षों के दौरान दुनिया की जनसंख्या
में वृद्धि जारी रहने का अनुमान है और 2024 में यह 8.2 अरब तक पहुंच जाएगी,जबकि 2080 के दशक के मध्य तक लगभग दुनिया की
आबादी लगभग 10.3 अरब हो जाएगी। हालांकि, चरम स्थिति पर पहुंचने के बाद वैश्विक
जनसंख्या में धीरे-धीरे गिरावट आने
का
अनुमान है और यह सदी के अंत तक घटकर 10.2 अरब रह
जाएगी। भारत पिछले साल चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश
बन गया था और 2100 तक यह उसी स्थान पर बना रहेगा। भारत की आबादी चीन से भी आगे
बढ़ गई है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2.1 फर्टिलिटी रेट (प्रजनन दर) पर खुद को सीमित कर लिया है। 2.1 फर्टिलिटी
रेट को भारत की जनसंख्या के हिसाब से बेहतर फर्टिलिटी रेट बताया जा रहा है। इससे
भारत में न तो नौजवानों की कमी रहेगी और न ही बूढ़े लोगों की संख्या नौजवानों की
तुलना में बढ़ेगी।
जापान इसी समस्या से जूझ रहा है। वहां बूढ़े लोगों की संख्या
नौजवानों से बहुत अधिक हो गई है। जनसंख्या विशेषज्ञ मनु गौड़ ने कहा कि यह बहुत विचित्र
स्थिति है। 1952 में सबसे पहले भारत ने परिवार नियोजन की प्लानिंग की थी और
आज दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है। जनसंख्या के मामले में यह
हमारी अब तक की सरकारों की नाकामी को दर्शाता है। भारत सरकार को जल्द से जल्द इस
पर एक नीति बनाने की जरूरत है। ये जो अभी आंकड़े हैं, वे सैंपल के हैं, हमारे असली आंकड़े 2011 के हैं। इसके बाद जनगणना नहीं हुई है।
यह भी जल्द कराने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि इस समस्या को काबू करने के लिए हाई फर्टिलिटी
रेट वाले राज्यों के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। जेपी नड्डा ने कहा कि विकसित भारत
का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकेगा, जब भारत
के लोग स्वस्थ रहें और यह तभी मुमकिन है जब परिवार छोटे हों।
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