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- सावधान चीनी- नमक में मिल रहे प्लास्टिक के सूक्ष्म कण
Posted by : achhiduniya
13 August 2024
पर्यावरण अनुसंधान संगठन टॉक्सिक्स लिंक’ ने नमक और
चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स’ शीर्षक से रिसर्च किया। संगठन ने इस
निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए टेबल नमक, सेंधा नमक, समुद्री नमक
और स्थानीय कच्चा नमक सहित 10 प्रकार के नमक पर रिसर्च किया। साथ
ही ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों से खरीदी गई पांच प्रकार की चीनी की भी जांच की। रिसर्च
के दौरान नमक और चीनी के सभी नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी का पता चला, जो फाइबर, छर्रे, फिल्म और
टुकड़ों सहित विभिन्न रूपों में मौजूद थे। इन माइक्रोप्लास्टिक का आकार 0.1 मिलीमीटर
(मिमी) से लेकर पांच मिमी तक था। रिसर्च पेपर के मुताबिक आयोडीन युक्त नमक में
बहुरंगी पतले रेशों और फिल्मों के रूप में माइक्रोप्लास्टिक्स की उच्चतम मात्रा
पाई गई। टॉक्सिक्स लिंक’ के संस्थापक-निदेशक रवि
अग्रवाल ने
कहा,हमारे रिसर्च
का उद्देश्य माइक्रोप्लास्टिक्स पर मौजूदा वैज्ञानिक डेटाबेस में योगदान देना था
ताकि वैश्विक प्लास्टिक संधि इस मुद्दे का ठोस और केंद्रित तरीके से समाधान कर सके।
टॉक्सिक्स लिंक’ के एसोसिएट निदेशक सतीश सिन्हा ने कहा,हमारे रिसर्च
में नमक और चीनी के सभी नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की अच्छी खासी मात्रा का पाया
जाना चिंताजनक है। मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक स्वास्थ्य
प्रभावों के बारे में तत्काल और व्यापक अनुसंधान की जरूरत है।
रिसर्च के मुताबिक
चीनी के नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की कान्सन्ट्रैशन 11.85 से 68.25 टुकड़े
प्रति किलोग्राम तक पाई गई जिसमें सबसे अधिक कान्सन्ट्रैशन गैर-कार्बनिक चीनी में
पाई गई। माइक्रोप्लास्टिक एक बढ़ती हुई
वैश्विक चिंता है,क्योंकि वे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचा सकते
हैं। ये छोटे प्लास्टिक कण भोजन, पानी और हवा के माध्यम से मानव शरीर
में प्रवेश कर सकते हैं। हाल के अनुसंधान में मानव अंगों जैसे फेफड़े, हृदय और यहां
तक कि मां के दूध और अजन्मे शिशुओं में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है। पूर्व
में किए गए अनुसंधानों के मुताबिक औसत भारतीय प्रतिदिन 10.98 ग्राम नमक
और लगभग 10 चम्मच चीनी का उपभोग करता है,जो विश्व
स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित सीमा से बहुत अधिक है।
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