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- Teacher Day Special शिक्षा के साथ प्रशासनिक कार्य का भी बोझ उठा रहें शिक्षक....
Posted by : achhiduniya
05 September 2024
शिक्षकों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ प्रमुख काम उन्हें पढ़ाई के अलावा हमेशा करना होता है, जो करना नहीं चाहते। कुछ का तो यहां तक कहना है कि वो घर जब जाते
हैं तभी उन्हें काम करने पड़ते हैं। शिक्षकों का कहना है कि काम के लिए कहीं से और
कोई भी सरकारी आदेश जारी हो जाता है। उन्हें उसे फॉलो करना पड़ता है। इसलिए उनके
पास पढ़ाने के अलावा कई काम होते हैं। शिक्षक को पहला काम तो स्कूल में पढ़ाने का है, लेकिन उसके अलावा भी कई काम है जो उसे करना होता है। शिक्षकों को बच्चों के लिए रोज मिड-डे मील या
पोषाहार के इंतजाम में भी लगे रहना होता है, जिसमें एक घंटे के आसपास समय देना होता है। उसके बाद जब बच्चों का
नामांकन होता है,तो उनका आधार कार्ड और पैन कार्ड शिक्षक ही अपडेट करता है। प्रदेश
में भजनलाल शर्मा सरकार की गठन के
बाद स्कूल में मोबाइल फोन प्रतिबंध लगा दिया गया है। मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने से शिक्षकों को डिजिटल कामों को करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों की अटेंडेंस ऑनलाइन हर दिन भरनी होती है। विद्यालय में बिजली और कम्प्यूटर की आमतौर पर समस्या बनी रहती है। राजस्थान के शिक्षकों को बूथ लेवल अधिकारी का काम हमेशा करना होता है। जिसमें उन्हें समय-समय पर चुनाव से संबधित काम करना होता है। इसके साथ ही उन्हें पल्स पोलियो अभियान' में भी काम करना होता है। इसके अलावा शिक्षकों को जनगणना का भी काम करना होता है।
राज्य में होने वाली परीक्षाओं में ड्यूटी करनी होती है और इसमें सुचारू और पारदर्शी तरीके से करवाने की उनकी जिम्मेदारी होती है। इसी तरह 8वीं और 10वीं कक्षा की परीक्षा में ड्यूटी लगती है। इसके बाद कॉपियों के मूल्यांकन के लिए भी ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा कई बार सरकारी कार्यक्रमों में ड्यूटी लगा दी जाती है। दरअसल,राजस्थान में शिक्षा विभाग स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या न होने की परेशानी से जूझ रहा है। दूसरी तरफ शिक्षकों को भी कई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनके कंधों पर बच्चों को पढ़ाने के अलावा कई और सरकारी कामों को करने की जिम्मेदारी है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।सरकारी कामों की वजह से अध्यपकों की व्यस्तता के कारण बड़ी संख्या में छात्र स्कूल में अनुपस्थित रहते हैं। सरकारें बदलती रहीं लेकिन इन व्यवस्थाओं में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो पाया। स्थिति जस की तस बनी हुई है।



