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- राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले से अमेरिका में छिड़ी बर्थ राइट पर बहस
Posted by : achhiduniya
22 January 2025
राष्ट्रपति
के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती घंटों में ट्रंप ने एक आदेश पर
हस्ताक्षर किया था, जिसमें घोषणा की गई थी कि
भविष्य में बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के, देश
में पैदा होने वाले बच्चों को अब नागरिक नहीं माना जाएगा। यह आदेश देश में वैधानिक
रूप से लेकिन अस्थायी रूप से रहने वाली कुछ माताओं के बच्चों पर भी लागू होगा, जैसे
कि विदेशी छात्र या पर्यटक। ट्रंप के शासकीय आदेश में कहा गया है कि ऐसे
गैर-नागरिकों के बच्चे अमेरिका के ‘‘अधिकार क्षेत्र के अधीन’’ नहीं
हैं और इस प्रकार वे 14वें संशोधन की दीर्घकालिक
संवैधानिक गारंटी के अंतर्गत नहीं आते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पद की
शपथ लेने के बाद ट्रंप के आदेश से
अमेरिका में जन्मे लोगों को स्वतः
नागरिकता प्रदान करने की नीति समाप्त हो जाएगी। ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार अभियान
के दौरान कहा था कि वह राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसा करेंगे। प्लैटकिन और प्रवासी
अधिकार अधिवक्ताओं ने संविधान के 14वें संशोधन का हवाला दिया
जिसके अनुसार अमेरिका में जन्मे और उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन रहने वाले लोग देश
के नागरिक हैं। अमेरिका में न्यू जर्सी
समेत 15 से अधिक प्रांतों ने कहा है
कि वो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को चुनौती देंगे जो जन्म के
आधार पर नागरिकता की संवैधानिक गारंटी को समाप्त करता है।
न्यू जर्सी के
डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल मैट प्लैटकिन ने कहा कि वह ट्रंप के आदेश पर रोक के लिए
मुकदमा दायर करने में 18 प्रांतों, ‘डिस्ट्रिक्ट
ऑफ कोलंबिया और सैन फ्रांसिस्को शहर के
एक समूह का नेतृत्व कर रहे हैं। प्लैटकिन ने कहा, राष्ट्रपति
के पास व्यापक शक्ति होती है, लेकिन वह शहंशाह नहीं हैं। इस
बीच भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अमेरिका में पैदा हुए किसी भी व्यक्ति के लिए स्वत:
नागरिकता के नियम में परिवर्तन संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासकीय
आदेश का विरोध किया है। इस कदम से ना केवल विश्व भर से आए अवैध अप्रवासी प्रभावित
होंगे, बल्कि भारत से आए छात्र और
पेशेवर भी प्रभावित होंगे।