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जिंदा इंसानों के साथ मुर्दों से भी मोहब्बत,18 सालों में 15,000 से ज्यादा शवों के किए पोस्टमॉर्टम बिना अवकाश लिए.... 2 बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स अपने नाम
Posted by : achhiduniya
22 February 2025
इंदौर
के एक सरकारी हॉस्पिटल के एक डॉक्टर के बारे में बताते
हुए अस्पताल
प्रशासन के एक बड़े अधिकारी ने कहा 64 वर्षीय
डॉक्टर भरत बाजपेयी ने बीते 18 साल में महीने भर की मेडिकल लीव के
अलावा कोई भी सामान्य छुट्टी नहीं ली है। शासकीय गोविंद बल्लभ पंत जिला चिकित्सालय
के चीफ सुपरिंटेंडेंट डॉ.जीएल सोढ़ी ने बताया कि हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम
डिपार्टमेंट की शुरुआत 6 नवंबर 2006
को हुई थी और डॉक्टर भरत
बाजपेयी तब से इस यूनिट में काम कर रहे हैं। डॉक्टर सोढ़ी ने बताया कि बीते 18 सालों
में बाजपेयी ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला कोई भी सामान्य अवकाश नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि हालांकि तबीयत बेहद खराब होने के कारण वह एक महीने के मेडिकल लीव पर
जरूर रहे थे। चीफ सुपरिंटेंडेंट ने कहा,बीते 18
सालों में बाजपेयी 15,000 से ज्यादा शवों
के पोस्टमॉर्टम कर चुके हैं। उनका लगातार
पोस्टमॉर्टम करना काम से उनका गहरा लगाव दिखाता है।
मृत्यु और न्याय को लेकर
अलग-अलग कोट्स बाजपेयी के दफ्तर से लेकर पोस्टमॉर्टम रूम के बाहर लिखे दिखाई देते
हैं, जिनमें प्रमुख हैं चैतन्य की मदद करते हुए मृत्यु यहां मुदित रहती
है और क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं कहोगे? 64 साल
के डॉक्टर बाजपेयी अगस्त में रिटायर होने वाले हैं। उन्होंने कहा,मेरे
कर्तव्य के केंद्र में हमेशा मुर्दे रहे। इसलिए मुझे कहने दीजिए कि मुझे जिंदा
इंसानों के साथ मुर्दों से भी मोहब्बत है। मैंने हमेशा चाहा कि मैं जिस भी मुर्दे
का पोस्टमॉर्टम करूं, उसे अदालत में इंसाफ मिले।
बगैर
छुट्टी लिए पोस्टमॉर्टम करने को लेकर बाजपेयी का जुनून राष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप
में 2 बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के
पन्नों पर भी दर्ज हो चुका है। डॉक्टर बाजपेयी के मुताबिक,
उनके परिवार में आए
सुख-दु:ख के कई मौकों पर भी उन्होंने अपने काम को तरजीह दी क्योंकि मेडिकोलीगल
मामलों में पोस्टमॉर्टम कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। उन्होंने
कहा कि किसी भी दशा में इस काम को टाला नहीं जा सकता। डॉक्टर बाजपेयी ने कहा, मैंने
अपने बेटे की शादी के दिन भी 2 शवों के पोस्टमॉर्टम किए थे। पोस्टमॉर्टम के बाद मैं शाम को बेटे की बारात और विवाह
समारोह में शामिल हुआ था। मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरे परिवार के लोगों ने हमेशा
तालमेल बनाए रखा और मुझे काम पर जाने से कभी नहीं रोका।