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- मूत्र को रिसाइकिल [फिल्टर] करके पीते है एस्ट्रोनॉट्स आखिर क्यू...?
Posted by : achhiduniya
21 February 2025
स्पेस मिशन के दौरान
कई बार ऐसा भी होता है कि अंतरिक्षयात्री किसी छोटे मिशन के लिए जाते हैं,
लेकिन किसी कारण वहां फंस जाते हैं। जैसे
बीते साल ही जून महीने में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की एस्ट्रोनॉट्स सुनीता
विलियम्स और बुच विल्मोर 8 दिनों के मिशन पर गए थे, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी होने के कारण वो अभी 200
से अधिक दिनों से वहां पर फंसे हुए हैं। अब
आपके दिमाग में आ रहा होगा कि इतने दिनों तक फंसने पर आखिर उनको स्पेस में पानी
कैसे मिलता होगा ? अब सवाल ये है कि एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में टॉयलेट
का इस्तेमाल कैसे करते हैं। बता दें कि अंतरिक्षयान में मौजूद टॉयलेट बहुत अलग
होते हैं। गुरुत्वाकर्षण जीरो होने के कारण अंतरिक्ष में
एस्ट्रोनॉट्स को ध्यान
में रखते हुए उनके लिए पूरी तरह से हैंडहोल्ड और फुटहोल्ड शौचालय बना होता है। इतना
ही नहीं इसमें खास वैक्यूम लगा होता है, जो खींचकर टॉयलेट की गंदगी को एक टैंक में लेकर
जाता है। अंतरिक्षयान में यूरिन के लिए भी एक खास तरह का वैक्यूम पाइप लगा होता है।
इसके अलावा अंतरिक्ष में यूरिन और शौच को अलग-अलग टैंकों में रखा जाता है। इसके
पीछे का कारण ये है कि यूरिन वाले अलग टैंक को रिसाइकिल करके पिया जाता है। स्पेस
में यूरिन को रिसाइकिल करना जरूरी होता है। क्योंकि वहां तक पानी पहुंचाना बहुत ही
खर्चीला काम है।
जानकारी के मुताबिक एक गैलन पानी को धरती से स्पेस स्टेशन तक
पहुंचाने में 83,000 डॉलर खर्च आएगा। वहीं अंतरिक्ष यात्री को पीने और
दूसरे कामों के लिए रोजाना 12 गैलन पानी की जरूरत होती है। इससे मिशन का खर्चा
बहुत ज्य़ादा बढ़ जाएगा, वहीं एक साथ बहुत ज्यादा पानी भी नहीं भेजा जा
सकता है। क्योंकि इससे विमान का भार बढ़ जाएगा। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने
फिल्टर सिस्टम लगाया हुआ है, जिसके जरिए यूरिन फिल्टर होकर पीने योग्य पानी
बनाता है।