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फर्जी परमिशन लेटर,फर्जी नक्शे,फेक डॉक्यूमेंट से रेरा नंबर,65 इमारतों को जमीनदोज करने का आदेश दिया हाई कोर्ट जाने पूरा मामला....?
Posted by : achhiduniya
19 February 2025
एक
व्हिसल ब्लोअर की जनहित याचिका के बाद हाई कोर्ट ने 65
इमारतों को तोड़ने का
आदेश इसी हफ्ते दिया है। इसके बाद 3500 परिवारों पर घर से बेघर होने की नौबत आ गई
है। इनकी मेहनत की कमाई से खरीदे आशियाने पर किसी भी समय महानगर पालिका का बुलडोजर
चलने वाला है। गौरतलब है की मुंबई से सटे कल्याण डोंबिवली महानगर
पालिका के अंतर्गत आने वाली 65 इमारतों को तोड़ने के लिए हाई कोर्ट ने
आदेश दिया है। इस आदेश के बाद इन 65 इमारतों में रह रहे 6500
लोगों पर पुनर्वासन
का संकट आ गया है। ये सभी इमारतें डोंबिवली ईस्ट और डोंबिवली वेस्ट के अलग-अलग
भूखंडों में बनाई गई हैं, जिनमें 35
भूखंड तो रिज़र्वेशन
प्लाट थे जो गार्डन, मैदान और अस्पताल के लिए रिजर्व थे। बिल्डर्स
में इन आरक्षित जमीनों पर अवैध इमारतों का निर्माण किया और इन्हें बेच
डाला। आरोप है कि कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका के
अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी परमिशन लेटर बनाए गए और फर्जी नक्शे पास करवाए गए
थे। इन फेक डॉक्यूमेंट के सहारे महारेरा अथॉरिटी से रेरा नंबर लेकर बैंक से होम
लोन ग्राहकों को दिलवा दिए गए। दरअसल,ये पूरा मामला साल 2020
में सामने आया,
जब पहली एफआईआर
मानपाडा पुलिस थाने में दर्ज हुई। 60 लोगों पर नकली दस्तावेज बनाकर 65
इमारतें अवैध तरीके
से बनाने का आरोप लगा। इसी मामले में दूसरी एफआईआर साल 2022
में मानपाडा पुलिस
थाने में दर्ज की गई। इस स्केम की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई,
जिसके बाद एसआईटी ने
जांच कर एक तीसरी एफआईआर कल्याण पुलिस थाने में दर्ज करवाई। जांच में ये बात सामने
आई है कि इन 65 इमारतों के निर्माण के लिए सरकार का 2400
करोड़ से ज्यादा का
राजस्व का नुकसान हुआ।
100 करोड़ रुपये के प्रधानमंत्री आवास योजना को
केंद्र सरकार से लेकर ग्राहकों के खाते में डालकर इसका एक अलग स्कैम हुआ। इन
आरोपियों ने महानगर पालिका के नकली स्टैंप और नकली पेपर्स बनाए,
महारेरा में नकली
पेपर्स अपलोड किए गए और 7 से 10
मंजिला इमारत बना दी
गई। इस केस में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बड़ी बात
यह है कि इस केस की जांच में ईडी ने बयान दर्ज किए,
ईओडब्ल्यू भी
इन्वॉल्व हुआ लेकिन अब तक बड़ी मछलियां पकड़ से बाहर हैं। 2
एफआईआर के बाद
एसआईटी जांच की मांग करने और ईडी जांच करवाने वाले इस केस के व्हिसल ब्लोअर संदीप
पाटिल के हाई कोर्ट के जनहित याचिका के बाद ये पूरा मामला बढ़ा और हाई कोर्ट ने सभी
65 इमारतों को 13 फरवरी को तोड़ने का आदेश जारी किया।