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"Freedom Of Speech" सोशल मीडिया की आपत्तिजनक पोस्ट को नियंत्रित कर अंकुश लगाना जरूरी...सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
14 July 2025
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि नागरिकों को
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का मूल्य समझना चाहिए। बेंच ने सोशल
मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने पर
विचार करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि नागरिकों के बीच भाईचारा होना चाहिए। बेंच
ने संविधान के आर्टिकल 19 (2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंधों
पर जोर दिया। बेंच ने कहा है कि, ये प्रतिबंध उचित रूप से लगाए गए हैं। बेंच ने कहा कि
उल्लंघन होने पर राज्य सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। उसने आगे कहा कि कोई
नहीं चाहता कि राज्य हस्तक्षेप करे। बेंच ने कहा कि सोशल मीडिया पर सभी विभाजनकारी
प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। हालांकि, उसने
यह स्पष्ट किया कि इसका मतलब सेंसरशिप नहीं है। बेंच ने मौखिक रूप से कहा,हम
सेंसरशिप की बात नहीं कर रहे हैं,लेकिन भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता
और व्यक्तियों की गरिमा के हित में यह केवल इस याचिकाकर्ता के बारे में नहीं है।
हमें याचिकाकर्ता से आगे जाकर इस पर विचार करना होगा। बेंच ने कहा कि अमेरिका में
अभिव्यक्ति की विषय-वस्तु की एक अवधारणा है। इसलिए अभिव्यक्ति
की स्वतंत्रता अलग है, लेकिन अब हम विषय-वस्तु पर हैं।
बेंच ने कहा कि राय रखना एक बात है, लेकिन
उसे किसी खास तरीके से कहना एक दुर्व्यवहार है और कभी-कभी यह घृणास्पद भाषण के
संदर्भ में अदालत में नहीं आएगा। बेंच ने कहा कि नागरिकों के बीच भाईचारा होना
चाहिए, तभी
यह सारी घृणा कम होगी और आगे कहा कि उचित प्रतिबंध सही हैं, लेकिन
यह 100 फीसदी
पूर्ण अधिकार नहीं हो सकता,लेकिन नागरिक अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं। सुप्रीम
कोर्ट ने सोमवार को सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश
बनाने पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर विभाजनकारी प्रवृत्ति पर
अंकुश लगाया जाना चाहिए, जिसका मतलब सेंसरशिप नहीं है। नागरिकों के बीच भाईचारा होना चाहिए।