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- भारत बना रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गाइडलाइन्स सिद्धांत….
Posted by : achhiduniya
20 December 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, सरकार तकनीक के विकास और उपयोग को लोकतांत्रिक बना रही है। सरकार
का मुख्य फोकस वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के लिए AI का उपयोग करना है। भारत की AI रणनीति केवल कागजी कानूनों तक सीमित नहीं है। सरकार कानून के
साथ-साथ तकनीकी समाधानों पर भी जोर दे रही है। इसके तहत सरकार IIT जैसे प्रमुख संस्थानों में अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तपोषित
कर रही है। विशेष रूप से डीपफेक, प्राइवेसी
प्रोटेक्शन और साइबर सुरक्षा के लिए टूल्स विकसित किए जा रहे हैं। सरकार ने
स्वीकार किया है कि जहां AI आर्थिक
विकास और सामाजिक बदलाव का एक बड़ा जरिया
है, वहीं यह समाज के लिए गंभीर खतरे भी पैदा कर सकता है। मंत्री
जितिन प्रसाद के अनुसार, AI के गलत
इस्तेमाल से पूर्वाग्रह और भेदभाव बढ़ सकता
है। अनुचित परिणाम सामने आ सकते हैं। पारदर्शिता की कमी और डेटा चोरी का खतरा भी
रहता है। 5 नवंबर, 2025 को जारी की गई ये गाइडलाइन्स देश में
सुरक्षित और जिम्मेदार एआई के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करती हैं। ये
गाइडलाइन्स सिद्धांत-आधारित हैं यानी ये
इनोवेशन -नवाचार को नहीं रोकेंगी, लेकिन
सुरक्षा मानकों से समझौता भी नहीं करेंगी।
निगरानी के लिए कोई नया जटिल तंत्र
बनाने के बजाय, सरकार IT एक्ट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) जैसे मौजूदा कानूनों पर ही भरोसा
करेगी। अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे बैंकिंग, हेल्थ)
के नियामक अपने दायरे में AI के
इस्तेमाल की निगरानी करेंगे। भारत का मानना है कि प्रभावी AI गवर्नेंस तभी सफल होगी जब उसे तकनीकी हस्तक्षेप का समर्थन
मिले। गौरतलब है की आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती
ताकत के बीच भारत सरकार ने
स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकों की सुरक्षा और प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं किया
जाएगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत हाई-रिस्क AI सिस्टम की अनियंत्रित तैनाती की अनुमति नहीं देगा। इसके बजाय, सरकार ने एक जोखिम-आधारित और साक्ष्य-आधारित गवर्नेंस मॉडल
अपनाया है।
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