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- 50% आरक्षण मुद्दा नागपुर नगरसेवकों की सदस्यता रद्द हो सकती है 40 OBC सीटों सहित कई...जाने क्यू...?
Posted by : achhiduniya
19 January 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी तक पूरे किए जाएं। हालांकि, नागपुर और चंद्रपुर जैसे निगमों में आरक्षण की सीमा 50% से ऊपर चली गई है। न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर और जे.के.माहेश्वरी के 2021 के फैसले के संदर्भ में देखा जाए तो,इन 40 सीटों पर चुनाव रद्द कर वहां उपचुनाव कराए जा सकते है। महाराष्ट्र में हुए महानगर पालिका चुनाव में ओबीसी (OBC) श्रेणी से निर्वाचित पार्षदों की सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक रही है। ओबीसी रिजर्वेशन मामले का संकट पूरे राज्य में हुए महानगर पालिका चुनाव पर छाया है। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के अधीन है। 21 जनवरी को सुनवाई है,लेकिन फैसला कब आएगा
यह अभी तय
नहीं है। फैसले में काफी समय भी लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यदि हक में
नहीं आया तो पूरे राज्य में ओबीसी आरक्षित सीटों के तहत चुनकर आए नगरसेवकों की जगह
खतरे में होगी। 21 जनवरी का अदालती फैसला न केवल नागपुर की बल्कि समूचे
महाराष्ट्र की राजनीति को खासा झटका दे सकता है। यदि आरक्षण रद्द हुआ, तो इन 40 सीटों की श्रेणी बदलकर फिर से उपचुनाव कराने पड़ सकते हैं।
अकेले नागपुर में इन सीटों की संख्या 40 है। जब चुनाव घोषित हुए तब ही राज्य निर्वाचन आयोग ने
साफ़ कर दिया था, कि सर्वोच्च न्यायालय का जो भी फैसला होगा उसके अधीन रह कर चुनाव घोषित किए
जा रहे हैं अर्थात, इन सीटों पर नामांकन दाखिल कर चुनाव लड़ने वाले सभी को इस आशंका की जानकारी
थी।
अब आरक्षण की सीमा का उल्लंघन होने से समस्या उत्पन्न हुई है। नागपुर समेत कई
नगर निगम में कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के
अनुसार, यदि
आरक्षण सीमा पार होती है, तो संबंधित पदों पर चुनाव रद्द किए जा सकते हैं। नागपुर महानगर पालिका में
पार्टीवार स्थिति देखी जाए तो इन 40 सीटों में भाजपा के 28 कांग्रेस के 10 और एआईएमआईएम (AIMIM) व मुस्लिम लीग के प्रत्येकी एक उम्मीदवार शामिल
हैं,यदि चुनाव रद्द होते हैं,तो सबसे बड़ा झटका भाजपा को लगेगा।
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