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- कहां पर है नदियों का मायका क्यू दी जाती है महिला नामों की संज्ञ...?
गंगा-यमुना-सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम का हिस्सा माना जाता है, जहां अदृश्य सरस्वती नदी भी मिलती है। भारतीय लोगों की मान्यता के मुताबिक, भारत की सनातन संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी, पालनहार, माता स्वरूप और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। ठीक वैसे ही जैसे मां जीवन देती है नदियां भूमि को उपजाऊ बनाती हैं और जीवन का पोषण करती हैं, इसलिए उन्हें मां (माता) के रूप में पूजते हैं, जैसे 'गंगा मैया' या 'नर्मदा मैया'। यह भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी के समान दर्जा देने और उनकी जीवन-पोषण क्षमता से जुड़ा है, हालांकि ब्रह्मपुत्र जैसी कुछ नदियां पुरुषवाचक मानी जाती हैं। इसलिए स्त्रीलिंग नाम दिए गए हैं जबकि ब्रह्मपुत्र और सोन जैसी नदियां अपनी विशालता और शक्ति के कारण पुरुष रूप में हैं। नदियों का मायका मध्य प्रदेश को कहा जाता है, क्योंकि यहां से नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, सोन और माही जैसी कई प्रमुख नदियां निकलती हैं और यह राज्य देश की कई बड़ी नदियों का उद्गम स्थल है, इसलिए इसे नदियों का मायका कहते हैं।

