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- 'F…. Off' जैसे शब्द उचित नहीं हो, लेकिन इसे यौन उत्पीड़न नहीं....पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
Posted by : achhiduniya
24 April 2026
पंजाब एवं हरियाणा
हाईकोर्ट ने कहा कि वर्कप्लेस पर शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी होता है,
लेकिन किसी एक बार की अभद्र टिप्पणी को,
जिसमें कोई यौन आशय ना हो,
उसे IPC की धारा 354A के तहत अपराध नहीं मान सकते। हाईकोर्ट ने पाया कि
आरोपी की तरफ से इस्तेमाल किए गए शब्दों में यौन प्रकृति जैसा कुछ नहीं था,
इसलिए इस मामले में यह धारा लागू नहीं
होती है। हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि वर्कप्लेस पर
किसी विवाद के दौरान 'F…. Off' जैसे शब्द का प्रयोग भले ही उचित नहीं हो,
लेकिन इसे यौन उत्पीड़न नहीं मान सकते,
जब तक उसमें यौन मंशा या ऐसा कोई संकेत
नहीं हो। जस्टिस कीर्ति सिंह ने साफ किया कि इस केस में बातचीत का संदर्भ कार्य
संबंधी मतभेद से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि यह केस एक प्राइवेट कंपनी के Director
से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2019 में गुरुग्राम महिला
पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR
को रद्द करने की डिमांड की थी।
शिकायतकर्ता, जो उस
कंपनी में बिजनेस मैनेजर थीं, ने अक्टूबर, 2018 में Director से मेडिकल लीव मांगी थी, जिसके बाद ईमेल के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत
हुई। इसी दौरान, आरोपी
ने 'F….. Off' जैसे शब्दों का
प्रयोग किया। फिर, उसी दिन शिकायतकर्ता ने कंपनी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे स्वीकार कर लिया गया था। हालांकि,
बाद में नोटिस पीरियड,
सैलरी और Breach of
Contract को लेकर विवाद बढ़
गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को कानूनी नोटिस भी भेजे।
पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR
को रद्द करने की डिमांड की थी।
शिकायतकर्ता, जो उस
कंपनी में बिजनेस मैनेजर थीं, ने अक्टूबर, 2018 में Director से मेडिकल लीव मांगी थी, जिसके बाद ईमेल के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत
हुई। इसी दौरान, आरोपी
ने 'F….. Off' जैसे शब्दों का
प्रयोग किया। फिर, उसी दिन शिकायतकर्ता ने कंपनी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे स्वीकार कर लिया गया था। हालांकि,
बाद में नोटिस पीरियड,
सैलरी और Breach of
Contract को लेकर विवाद बढ़
गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को कानूनी नोटिस भी भेजे। फिर करीब 4
महीने बाद शिकायतकर्ता ने यौन उत्पीड़न का
आरोप लगाते हुए Director के खिलाफ FIR दर्ज कराई। हाईकोर्ट ने इस मामले में यह भी ध्यान
दिया कि FIR दर्ज
करवाने में शिकायतकर्ता की तरफ से देरी हुई और यह केस पहले से चल रहे कॉन्ट्रैक्ट
विवाद से जुड़ा था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जब आरोप में अपराध का
मूल तत्व ही नहीं है, तो कार्यवाही को जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा। हाईकोर्ट ने इसी
आधार पर Director के खिलाफ FIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
हालांकि, याचिकाकर्ता
को एक महीने के भीतर PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में 20
हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया।

