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- दूसरे व्यक्ति से महिला का निकाह हलाला- तलाक के बाद दोबारा निकाह करने से पहले पति का इनकार
Posted by : achhiduniya
11 September 2026
मामला गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम दंपति के
बीच वर्ष 2020
में विवाद के बाद
तलाक हो गया था। विवाद के बाद
मामला थाने तक पहुंचा और महिला की ओर से पति के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। झारखंड में रांची हाईकोर्ट जस्टिस संजय कुमार
द्विवेदी की अदालत ने कहा कि अगर तलाक के बाद महिला दूसरे व्यक्ति से निकाह करती
है और बाद में हलाला की प्रक्रिया के बाद पूर्व पति से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो पूर्व पति का
दोबारा शादी से इनकार करना अपने आप में कोई संज्ञेय अपराध नहीं है। अदालत ने इसी मामले में आरोपी
पूर्व पति को अग्रिम जमानत
भी प्रदान की है। इसके बाद
तलाकशुदा महिला ने दूसरे व्यक्ति से निकाह किया। बाद में हलाला की प्रक्रिया के बाद उसने अपने
पहले पति से दोबारा निकाह करने की इच्छा जताई। आरोप है कि पूर्व पति ने उससे दोबारा निकाह करने से इनकार
कर दिया। इसके बाद महिला
की ओर से पूर्व पति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। मामले में आरोपी पूर्व पति ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते
हुए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और अग्रिम जमानत की मांग की,सुनवाई के दौरान
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने
मामले के तथ्यों पर विचार किया।
अदालत ने कहा कि
तलाक के बाद महिला का किसी दूसरे पुरुष से निकाह होने के बाद पूर्व पति पर दोबारा
उससे निकाह करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। केवल इस आधार पर कि पूर्व पति ने अपनी तलाकशुदा
पत्नी से दोबारा निकाह करने से इनकार कर दिया, इसे अपने आप में
अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी
स्पष्ट किया कि सामान्य आपराधिक कानून या मुस्लिम पर्सनल लॉ किसी व्यक्ति को उसकी
इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य व्यक्ति से दोबारा निकाह करने के लिए बाध्य नहीं करता यानी
किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उससे विवाह करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं
किया जा सकता। इस मामले में
हाईकोर्ट ने आरोपी पूर्व पति को राहत देते हुए 25-25 हजार रुपये के दो
निजी मुचलकों पर अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान की। अदालत के इस आदेश को तलाक के बाद दोबारा निकाह से इनकार के
मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।


