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ऑपरेशन टाइगर पर मातोश्री में मंथन
संजय राउत ने
कहा कि ऑपरेशन टाइगर की चर्चा पिछले दो वर्षों से लगातार हो
रही है, लेकिन ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए राउत
ने कहा,जिस दिन हमारी सत्ता आएगी, उस दिन बीजेपी नहीं बचेगी। हम उसे
टुकड़े-टुकड़े कर देंगे और उनके नेताओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। उद्धव ठाकरे के घर में हो रही बैठक में
अरविंद सावंत मुंबई से और नासिक से राजा भाऊ वाजे पहुंचे। इसके अलावा भी कई सांसद
मातोश्री पहुंचकर मीटिंग में शामिल हुए। कुछ नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के
जरिए मीटिंग अटेंड की। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे की
मौजूदगी में पार्टी सांसदों की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि,
धाराशिव से सांसद
ओमराजे नाईक निंबालकर बैठक में शामिल नहीं हो पाए। जानकारी के अनुसार उनके बेटे को
पुणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसके चलते वे अनुपस्थित रहे। इस बैठक में
पार्टी के दो सांसद शामिल नहीं हुए। इसे लेकर कई तरह
के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने कथित ऑपरेशन टाइगर
की चर्चाओं पर
प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक
बुलाई है, जो एक नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है।संजय राउत ने कहा,जिस तरह विधायकों की बैठकें होती हैं,
उसी तरह आज सांसदों
की बैठक बुलाई गई है। हमारे सभी सांसद बैठक में उपस्थित रहेंगे। जो सांसद किसी
कारणवश नहीं आ पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से
बैठक से जोड़ा जाएगा और उनसे चर्चा की जाएगी। संजय राऊत ने कहा कि मातोश्री में
आयोजित सांसदों की बैठक में पार्टी के सभी 9 सांसद शामिल हुए। इनमें से 4
सांसद मातोश्री में
शारीरिक रूप से मौजूद रहे, जबकि 5 सांसद ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े। राऊत ने बताया कि उस्मानाबाद के सांसद ओम राजे निंबालकर के
बेटे की तबीयत खराब है और वह पुणे के अस्पताल में भर्ती हैं,
इसलिए निंबालकर
ऑनलाइन शामिल हुए। शिर्डी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे की पत्नी बीमार हैं और
अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए वह भी ऑनलाइन जुड़े। हिंगोली के सांसद नागेश पाटील आष्टीकर
अपने बेटे के विधानसभा चुनाव अभियान में व्यस्त होने के कारण ऑनलाइन शामिल हुए। यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख के घर
बेटी का विवाह समारोह होने के कारण वह ऑनलाइन बैठक में जुड़े। संजय जाधव भी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में
शामिल हुए।
सोनिया गांधी और कांग्रेस उन्हें अध्यक्ष बनाना चाहती तो...गहलोत ने दोहराई होटल में बंद होने वाली कहानी
अशोक
गहलोत ने कहा, अगर
कांग्रेस और सोनिया गांधी मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनातीं, तो क्या मैं मना करूंगा? राजस्थान
सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने अशोक गहलोत के इस बयान पर रिएक्शन दिया है।
जोगाराम पटेल ने कहा कि जब-जब सचिन पायलट का नाम किसी प्रतिष्ठित पद के लिए आगे
किया जाता है या संभावना बनती है तो अशोक गहलोत होटल में बंद होने वाली कहानी फिर
दोहरा देते हैं। सितंबर, 2022 में जब कांग्रेस नेतृत्व ने नए सीएम के नाम का
निर्णय करने के लिए जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई, तो गहलोत के समर्थक विधायकों ने इस मीटिंग का
बहिष्कार कर दिया था। कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक इंतजार ही करते रह गए,
लेकिन
गहलोत के समर्थक विधायक वहां नहीं
पहुंचे थे। इसके बाद, गहलोत गुट के लगभग 90 से ज्यादा विधायक शांति धारीवाल के घर पर जमा हुए
थे और वहां से ये सभी तत्कालीन स्पीकर सीपी जोशी के आवास पर गए और अपना इस्तीफा
सौंप दिया था। विधायकों ने मांग की थी कि राजस्थान का नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
की पसंद का ही हो। इस खुले विद्रोह से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व बहुत नाराज हो
गया था। हालांकि, इसके बाद अशोक गहलोत ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलकर घटना पर खेद
जताया था और इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली थी।
उसके बाद, अशोक गहलोत खुद कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से
बाहर हो गए थे। इसी के बाद मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया
था। जोगाराम पटेल ने कहा, अशोक गहलोत प्रत्यक्ष तौर पर सचिन पायलट पर आरोप
लगाते हैं कि उन्होंने BJP के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने की कोशिश की थी। अगर
उनकी सरकार में ऐसी कोई घटना हुई थी तो उन्होंने आज तक केस क्यों नहीं दर्ज कराया?
अशोक गहलोत खुद अपनी पार्टी में दरकिनार
हो चुके हैं इसलिए बिना किसी आधार पर ऐसे स्टेटमेंट देने के आदि हो चुके हैं।'
महंगाई पर नियंत्रण नहीं तो...राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी…NCP प्रमुख शरद पवार
राष्ट्रवादी
कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने दावा किया कि महंगाई के कारण देश भर के लोगों
को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने सरकार के इस रुख पर सवाल उठाया
कि मूल्य वृद्धि नियंत्रण में है। एलपीजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बारे
में पूछे जाने पर पवार ने कहा, प्रधानमंत्री कहते हैं कि महंगाई को नियंत्रित
किया जा रहा है। यदि यही नियंत्रण है, तो इसका मतलब लोगों को किस्तों में झटके देना है।
इसके लिए जिम्मेदार लोगों को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भारतीय जनता
पार्टी (बीजेपी) पर महंगाई के संबंध में अपने पहले के रुख से पलटने का आरोप लगाया
और कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी अब आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रति
वैसी चिंता नहीं दिखा रही है, जैसी उसने विपक्ष में रहते हुए दिखाई थी।
वडेट्टीवार ने कहा कि
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के दौरान जब भी रसोई
गैस की कीमतें बढ़ाई जाती थीं, भाजपा नेता विरोध प्रदर्शन करते थे,
लेकिन सत्ता में आने के बाद से ईंधन और
एलपीजी की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी के बावजूद वे चुप हैं। उन्होंने कहा कि
पिछले कुछ महीनों में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई
है और पेट्रोल, डीजल
एवं सीएनजी की कीमतों में भी हाल के वर्षों में कई बार संशोधन हुए हैं। दरअसल,देश में बढ़ती
महंगाई और घरेलू रसोई गैस (LPG) के दामों में बढ़ोतरी को लेकर शरद पवार ने केंद्र
सरकार की आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि आवश्यक वस्तुओं की बार-बार बढ़ रही
कीमतों का बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है, जिसके लिए सरकार को राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।






