Posted by : achhiduniya 05 May 2015

दिमाग के तापमान को नियंत्रण में रखती..........
इंसानों के साथ जानवर सहित कई अन्य प्रजातियां भी उबासी लेती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक भ्रूण मां के गर्भ में 11वें हफ्ते से ही उबासी लेना शुरू कर देता है। आमतौर पर उबासी की समयावधि छह सेंकड की होती है। लेकिन यह कभी कभार इससे थोड़ी अधिक भी हो जाती है। मनुष्य अपने जीवनकाल में औसतन 240,000 बार उबासी लेता है। 

उबासी को लेकर हमारे समाज में बहुत सारी गलतफहमियां हैं। मसलन, इसे नींद आने या बोरियत से जोड़कर देखा जाता हैजबकि प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए रिसर्च में पता चला है कि उबासी नींद आने या बोरियत का संकेत नहीं है बल्कि यह दिमाग के तापमान को नियंत्रण में रखती है। हमारे शरीर की बनावट और कार्यविधि कुछ इस तरह व्यवस्थित है कि नहीं चाहते हुए भी उबासी की स्थिति में एकाएक मुंह खुल जाता है। इससे दिमाग को ठंडक तो मिलती ही है साथ में चेहरे की मांसपेशियों में भी खिंचाव होता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी व्यक्ति को उबासी लेता देखकर आपको भी उबासी क्यों आने लगती है? उबासी लेने की समयावधि क्या होती है या फिर इंसान किस उम्र से उबासी लेना शुरू कर देता है?यूं तो उबासी एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है लेकिन इससे जुड़ी कई छोटी-बड़ी बातों पर हम ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि डॉक्टर उबासी को संक्रामक नहीं मानते हैं लेकिन यह काफी हद तक इसी तरह बड़ी तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व दूसरे से तीसरे व्यक्ति में फैलती है। अमेरिकन अकादमी ऑफ स्लीप मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक उबासी से शरीर में ऑक्सीजन की कमी की भरपाई भी होती है। दरअसल, जब फेफड़ों को पंप करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती तो वह मुंह से उबासी के जरिए ऑक्सीजन की भरपाई करता है। 

दिमाग अपने वॉल्स को ठंडा रखने के लिए उबासी लेता है। वर्ष 2004 में किए गए एक रिसर्च में यह बात निकल कर सामने आई थी कि 50 फीसदी लोग सामने वाले को देखकर उबासी लेते हैं। 2012 में किए गए रिसर्च के मुताबिक आनुवंशिक और भावनात्मक रूप से जुड़े लोगों को उबासी लेते देखकर अधिक उबासी आती है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधार्थियों ने रिसर्च में पता लगाया है कि इंसान में अत्यधिक उबासी भी काफी कुछ बयां करती है। मसलन, यदि आपको थोड़ी-थोड़ी देर में उबासी आ रही है तो यह अनिद्रा की निशानी है, जिससे आगे चलकर कई तरह की बीमारियां हो जाती है। उबासी को रोकने पर भी शरीर पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है. इसलिए चिकित्सक भी कहते हैं कि उबासी आने पर इसे रोकना नहीं चाहिए। 

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