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- बेवकूफ बनाने और ठगने की आर्ट...............
Posted by : achhiduniya
23 July 2015
ज्योतिष के नाम पर बिजनेस चला रहे ये लोग शुरुआती बातचीत में ही पता लगा लेते हैं कि आने वाले 'कस्टमर' की कमजोर नस कौन सी है. उसके बाद वे 'कस्टमर' के पास्ट के बारे में कुछ जनरल सी बातें बताते हैं- जो हर किसी पर लागू होती हैं। जैसे : समय खराब चल रहा हो, या कोई बडी समस्या अचानक सामने आ गई हो, या फिर हजार कोशिशों के बावजूद कुछ सपने पूरे ही नहीं हो रहे हों, ऐसी ही न जाने कितनी सिचुएशन्स में लोग अपनी हॉरोस्कोप लेकर कथित ज्योतिषियों के पास दौड पडते हैं। डर और उम्मीदों के पूरा होने के इस खेल में 'फर्जी' ज्योतिषियों की तो पौ बारह हो रही है।
कभी नाराज ग्रहों को शांत कराने, तो कभी फेवरेबल नक्षत्रों से अच्छा फल पाने की उम्मीद में लोग कर्म-कांड कराने और तरह-तरह के स्टोन्स पहनने पर हजारों रुपए देकर विशेष पूजा कराने को तैयार हो गए। मिस्टर गहरवार विदेश जाकर सैटेल होने का सपना देख रहे थे। बताया गया, 100 फीसदी पक्का योग है। छोटी-मोटी बाधाएं दूर करने के नाम पर न जाने कितनी रकम खर्च कर डाली। व्रत उपवास, दान क्या -क्या नहीं किया पर नतीजा ढाक के तीन पात वीजा न मिलना था, न मिला।
अब वे अपनी विदेश जाने की इस मुहिम के कारण गंवाए पांच साल और दो-ढाई लाख रुपए के लिए अफसोस करते हैं। मिसेज त्रिपाठी की 31 साल की ननद की शादी नहीं हो पा रही थी। वे भी एक 'आंटी' के झांसे में आ गईं। आंटी ने न जाने कितने ग्रहों को फेवर में लाने के लिए दसियों हजार के नग-पत्थर उनके मत्थे मढ दिए ननद को तरह-तरह की मालाएं-अंगूठियां धारण कराई गईं। गाय को भोजन, पीपल की पूजा, ननद के वजन के बराबर फल दान और न जाने क्या-क्या पर कोई सुपात्र अब तक नहीं मिल सका।
भारतीय ज्योतिषशास्त्र
का लोहा भले ही आज अमेरिका तक माना जा रहा हो, पर ये भी एक कडवा सच है कि इस विद्या के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने और ठगने की आर्ट भी हमारे यहां ही फल-फूल रही है।



