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- कब.......?अस्तित्व में आया कंडोम......
Posted by : achhiduniya
30 July 2015
लोग आज जिस लुबरीकेंट रबर यानी कंडोम का धड़ल्ले से इस्तेमाल
करते है वे उसके फायदे व नुकसान से भली- भांती परिचित है लेकिन यह आया कब...?और कहा...? से इसके बारे मे शायद ही किसी
को पता हो। प्राचीन कहावतों पर यकीन करें तो सेक्स को कोई अपने
जीवन काल में भी पूरा नहीं समझ सकता, क्योंकि वह ब्रह्मांड की तरह विस्तृत, गहरा और असीम है।किसी
भी व्यक्ति के जीवन की खुशियां बहुत कुछ उसकी सेक्स लाइफ पर ही निर्भर होती हैं।
पुरुष
औसतन प्रत्येक सात सेकेंड में एक बार सेक्स के बारे में सोचते हैं। अमेरिका मे हुए
एक शोध से पता चला है कि बीते तीन दशकों में वहां के एक औसत पुरुष की शुक्राणु
संख्या में करीब तीस प्रतिशत की गिरावट आई है। यौन क्रिया के दौरान महिलाओं के
मुकाबले पुरुषों को कहीं ज्यादा पसीना आता है। स्त्रियां की शारीरिक संरचना में
बदन से निकलने वाले पानी को नियंत्रित करने की क्षमता होती है।
मानव शरीर का सबसे
संवेदनशील हिस्सा त्वचा है। इंसान और डाल्फिन, विश्व की दो ऐसी
प्रजातियां हैं जो अपने आनंद के लिए सेक्स का सहारा लेती हैं। महिलाओं के लिए
संभोग एक कारगर दर्द निवारक है। क्योंकि संभोग के दौरान शरीर में एंडोमार्फीन का
स्राव होता है, जो कि एक शकितशाली दर्द निवारक माना जाता है।
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि पश्चिमी समाज में पैर यौन आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र
हैं।
एक औसत वयस्क के शरीर में इसका वजन छह पाउंड होता है। आज धड़ल्ले से इस्तेमाल
होने वाला कंडोम सन 1500 में ही अस्तित्व में आ गया था। कंडोम का सबसे
दिलचस्प इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देखने में आया था।
उस वक्त सिपाही
अपनी राइफलों की नली को इससे ढका करते थे क्योंकि भीतर खारा पानी जाने से वह खराब
हो जाती थीं।
आज इसी कंडोम को गर्भ निरोधक व गलत
तरीके से बनाए जाने वाले शारीरिक संबंधो से उत्पन्न होने वाली तकलीफ़ों बचने के रूप
मे इस्तेमाल किया जाता है।





