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- सेवा से सुख और शांती मिलेगी.....लेकिन कैसे....?
Posted by : achhiduniya
17 October 2015
आज हम अपने आपको ही चिंता और दुख से घिरे महसूस करते है। हमेशा यही सोचते है कि मुझसे ज्यादा दुखी कोई नही होगा। लेकिन यह अर्ध सत्य है,पूर्ण सत्य यह है कि जैसे हम दुखी है वैसे दूसरे भी दुखी होते है,यह बात और कि उनके दुखो का कारण कुछ और हो सकता है। हा इन दुखो को दूर किया जा सकता है। अपने दुख को दूर करने के लिए विश्व के दुख में भागीदार बनो। खुद के आनंद की वृद्धि के लिए विश्व के आनंद में सहभागी हो बनो। मेरा क्या होगा.......?
इस संसार से मुझको क्या मिलेगा......?
ऐसा सोचने के बदले यह सोचो कि इस संसार के लिए मैं क्या कर सकता हू.......? जब हम सभी लोग इस विचार मे आएंगे कि वे समाज को अपना क्या योगदान दें,
तब वह समाज खुशहाल-संपन्न समाज हो जाएगा। हम सबको अपनी व्यक्तिगत विचार को शिक्षित और शिष्ट करना है ताकि समय के साथ हमारे ज्ञान की वृद्धि हो।
मन के
विचार मेरा क्या होगा से आगे मैं क्या योगदान दे सकता हूं यह
सोच होना चाहिए। जब समय के साथ तुम्हारे ज्ञान की वृद्धि होती है,
तब उदासीनता संभव ही नहीं। सेवा से पुण्य मिलता है। पुण्य तुम्हारे ध्यान को और गहन करता है,ध्यान तुम्हारी मुस्कान वापस लाता है। ज्ञान की प्राप्ति का कोई अंत नहीं है।


