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- अपने सुख-दुख के जिम्मेदार आप.........?
Posted by : achhiduniya
24 March 2016
मनुष्य
को हमेशा उन्नति के लिए ऊपर उठने के लिए प्रयास करना चाहिए। नकारात्मक सोच रखने से
मन दुःखी होता है और क्रोध बढ़ता है। वाणी में प्रेम और मधुरता नहीं रह जाती है। अनायास
ही कोई गलत कार्य कर बैठते हैं। इसलिए सोच बदलिए और उन्नति के लिए प्रयास कीजिए। जैसा
आप सोचेंगे वैसा हो जाएगा। हस्तरेखा विज्ञान भी भविष्य को जानने का एक माध्यम है। लेकिन
अगर आप अपने हाथों को गौर से देखें तो पाएंगे कि समय-समय पर हाथों की रेखाओं में परिर्वतन
हो रहा है। यह परिर्वतन आपके कर्म और व्यवहार के अनुरूप होता है। इसलिए अगर आप सोचते
हैं कि एक बार जो किस्मत में लिखकर आ गया है ऐसा होना तय है तो मन से इस धारणा को निकाल
दीजिए।
अगर ऐसा होता है तो ज्योतिषशास्त्र से सिर्फ भविष्य देखा जा सकता था। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में भविष्य देखने के साथ ही साथ उपाय भी बताये जाते हैं ताकि घटना में बदलाव किया जा सके। आप दुःखी हैं तो इसका जिम्मेदार कोई और नहीं है बल्कि आप खुद हैं। इसी प्रकार अगर आप सुखी है तो यह भी आपको अपने ही कारण प्राप्त हुआ है। ईश्वर का आपके सुख-दुःख से कोई लेना देना नहीं है। ईश्वर तो मात्र कर्म का फल प्रदान करने वाला है। यूं समझ लीजिए कि ईश्वर कमल का पुष्प है।
कमल पुष्प जैसे कीचड़ में रहकर भी कीचड़ के गुण दोष से प्रभावित नहीं होता, उसी प्रकार ईश्वर सब में और सब के बीच में रहकर भी किस से न तो मित्रता करता है और न शत्रुता। आप जैसा करेंगे और जैसा चाहेंगे वैसे ही आपके आस-पास का वातावरण तैयार कर देगा।
अगर ऐसा होता है तो ज्योतिषशास्त्र से सिर्फ भविष्य देखा जा सकता था। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में भविष्य देखने के साथ ही साथ उपाय भी बताये जाते हैं ताकि घटना में बदलाव किया जा सके। आप दुःखी हैं तो इसका जिम्मेदार कोई और नहीं है बल्कि आप खुद हैं। इसी प्रकार अगर आप सुखी है तो यह भी आपको अपने ही कारण प्राप्त हुआ है। ईश्वर का आपके सुख-दुःख से कोई लेना देना नहीं है। ईश्वर तो मात्र कर्म का फल प्रदान करने वाला है। यूं समझ लीजिए कि ईश्वर कमल का पुष्प है।
कमल पुष्प जैसे कीचड़ में रहकर भी कीचड़ के गुण दोष से प्रभावित नहीं होता, उसी प्रकार ईश्वर सब में और सब के बीच में रहकर भी किस से न तो मित्रता करता है और न शत्रुता। आप जैसा करेंगे और जैसा चाहेंगे वैसे ही आपके आस-पास का वातावरण तैयार कर देगा।


