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- बचे इस कारण आफिस मे कम होती इज्जत....बिगड़ सकती है बात ........?
Posted by : achhiduniya
07 March 2016
आपका
व्यक्तित्व आपके काम पर काफी असर डालता है। इसके अतिरिक्त आपकी मेहनत और लगन भी
प्रभाव डालती है। इन सबके बावजूद कई बार आपको वह संतुष्टि नहीं होती जितनी होनी
चाहिए या आप अपने आप को उस स्तर पर नहीं देख पाते या पातीं है,जिस स्तर पर आप स्वयं को देखना चाहते-चाहती हैं। कहीं न कहीं कुछ गलतियां
रह जाती हैं जिनके कारण आप उस स्तर के अच्छे कार्मिक नहीं बन पातीं जिसके आप हकदार
हैं। कपडे आपके व्यक्तित्व का आईना होते हैं। अपने प्रोफेशन के अनुसार अपनी ड्रेस
का चुनाव करें। आफिस में कभी भी अधिक भडकीले या अति साधारण कपडे न पहनें।
अक्सर देखने मे आता है की कुछ लोगों का गुस्सा मानो नाक पर ही धरा रहता है।जैसे ही किसी ने कुछ कहा, बस गुस्से में उत्तर देना उनकी आदत में शुमार रहता है। इस प्रकार का स्वभाव आपको औरों से दूरी बनाने में मदद करता है। बहुत से लोगों को आदत होती है आफिस से व्यक्तिगत प्रिंट आउट लेना, चैटिंग करना, मैसेज करना आदि ये सभी आदतें गलत हैं। बहुत समय तक आप इन्हें छुपा नहीं सकते. इससे आपका इंप्रेशन खराब होता है।गलतियों को मानें अगर आप से कोई गलती हो गई हो जिसे आप जानते हैं तो उसे स्वीकारने में आनाकानी न करें। अपनी गलती कभी भी दूसरों पर न डालें। सकारात्मक सोच रखें। गलतियों से सुधारना सीखें। गलती स्वीकारते हुए शर्मिन्दगी महसूस न करें। कुछ लोगों को काम समय पर पूरा न करने की आदत होती है। डांट से बचने के लिए वे कोई न कोई बहाना बनाते रहते हैं। एक दो बार तो बहाना चल जाता है पर हमेशा यह आदत काम नहीं आती बार-बार की इस आदत से बॉस और क्लीग्स समझ जाते हैं और आपका इंप्रेशन खराब होता है।
कभी-कभी गुस्से वाला स्वभाव आपको पीछे धकेलता है। आपकी गलती को न सुधारने में मदद करता है। किसी ने या बॉस ने कुछ कह दिया तो या तो तेवर दिखाकर आप अपने खोल में सिकुड जाएंगी या जवाब देंगी। ये दोनों ही गलत हैं। ऐसे में अपनी सफाई बात के शांत हो जाने पर देना बेहतर होता है। तुरंत प्रतिक्रिया न करें। चुप रह जाने पर भी लोग आप पर बात-बेबात पर भडकते रहेंगे। बेहतर होगा जब मन शांत हो, तभी उनसे बात करें और अपना पक्ष स्पष्ट करें। छुट्टी भी झूठे बहाने बना कर न लें, इससे धीरे-धीरे दूसरों के विश्वास को भी कम करने लगते हैं, दूसरों की निगाहों में आप बहानेबाज बन जाते हैं जो ठीक नहीं।
अक्सर देखने मे आता है की कुछ लोगों का गुस्सा मानो नाक पर ही धरा रहता है।जैसे ही किसी ने कुछ कहा, बस गुस्से में उत्तर देना उनकी आदत में शुमार रहता है। इस प्रकार का स्वभाव आपको औरों से दूरी बनाने में मदद करता है। बहुत से लोगों को आदत होती है आफिस से व्यक्तिगत प्रिंट आउट लेना, चैटिंग करना, मैसेज करना आदि ये सभी आदतें गलत हैं। बहुत समय तक आप इन्हें छुपा नहीं सकते. इससे आपका इंप्रेशन खराब होता है।गलतियों को मानें अगर आप से कोई गलती हो गई हो जिसे आप जानते हैं तो उसे स्वीकारने में आनाकानी न करें। अपनी गलती कभी भी दूसरों पर न डालें। सकारात्मक सोच रखें। गलतियों से सुधारना सीखें। गलती स्वीकारते हुए शर्मिन्दगी महसूस न करें। कुछ लोगों को काम समय पर पूरा न करने की आदत होती है। डांट से बचने के लिए वे कोई न कोई बहाना बनाते रहते हैं। एक दो बार तो बहाना चल जाता है पर हमेशा यह आदत काम नहीं आती बार-बार की इस आदत से बॉस और क्लीग्स समझ जाते हैं और आपका इंप्रेशन खराब होता है।
कभी-कभी गुस्से वाला स्वभाव आपको पीछे धकेलता है। आपकी गलती को न सुधारने में मदद करता है। किसी ने या बॉस ने कुछ कह दिया तो या तो तेवर दिखाकर आप अपने खोल में सिकुड जाएंगी या जवाब देंगी। ये दोनों ही गलत हैं। ऐसे में अपनी सफाई बात के शांत हो जाने पर देना बेहतर होता है। तुरंत प्रतिक्रिया न करें। चुप रह जाने पर भी लोग आप पर बात-बेबात पर भडकते रहेंगे। बेहतर होगा जब मन शांत हो, तभी उनसे बात करें और अपना पक्ष स्पष्ट करें। छुट्टी भी झूठे बहाने बना कर न लें, इससे धीरे-धीरे दूसरों के विश्वास को भी कम करने लगते हैं, दूसरों की निगाहों में आप बहानेबाज बन जाते हैं जो ठीक नहीं।


