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- सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए अध्यात्म को भी अपनाए.........
Posted by : achhiduniya
08 March 2016
सुसंस्कृत
और पढे लिखे लोग अध्यात्म की विधा योग को जानना जरूरी मानते हैं। विभिन्न धार्मिक
गतिविधियां हमें मानसिक शांति उपलब्ध कराती हैं। स्वाध्याय न केवल हमारा ज्ञान
बढाने में मदद करता है बल्कि मानसिक संतोष भी उपलब्ध कराता है। ध्यान से हमारी
एकाग्रता बढती है तथा शांति भी प्राप्त होती है। मनुष्य की सारी प्रवृत्तियां उसके
दृष्टिकोण के आधार पर होती हैं। अध्यात्म हमें सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर
भली-बुरी दोनों स्थितियों में प्रसन्न रहने की प्रेरणा देता है। फल की चिंता छोडकर
कर्म की सच्चाई में आनंदित रहो का चिंतन, मनुष्य को
तनावमुक्त रखता है।नित्य प्रार्थना-ध्यान करने वाले तनावमुक्तता का अनुभव करते हैं।
अत: तनावमुक्त होने में अध्यात्म बहुत मददगार है।धार्मिक व्यक्ति तनावग्रस्त कम
होते हैं।उनका खानपान शुद्ध होता है। सिगरेट, मांसाहार,
शराब से वे बचे रहते हैं। धर्मस्थल पर उपलब्ध पूजा, प्रार्थना, जप, ध्यान, स्वाध्याय न केवल मानसिक शांति उपलब्ध कराते हैं बल्कि कई मानसिक रोगों से
बचाते हैं।
तनाव से मुक्त होने में अध्यात्म बहुत ही प्रभावी सिद्ध हुआ है।अध्यात्म, व्यक्ति में मृत्यु का भय समाप्त कर जीवन का आनंद प्रदान कराता है। परिणामस्वरूप धार्मिक व्यक्ति मृत्यु की विभीषिका से मुक्त रहता है। प्रत्येक धर्म शरीर को धर्म का साधन मानता है तथा शरीर की भलीभांति रक्षा करने का उपदेश देता है।अत: आध्यात्मिक लोग शरीर को ईश्वर का मंदिर समझकर उसकी रक्षा करते हैं। संगीतमय पूजन अध्यात्म व संगीत दोनों के लाभ उपलब्ध कराता है। गुरुओं के उपदेश हमें दुष्प्रवृत्ति छोड सद्प्रवृत्ति धारण कर सुखी जीवन की प्रेरणा देते हैं। वर्तमान स्थिति में संतोष रखते हुए उन्नति हेतु प्रयत्न करना, ऐसी दृष्टि हमें संतोष प्रदान कर स्वस्थ जीवन में बहुत सहायक होती है। प्रत्येक धर्म में मांस, मदिरा व गलत आचरण का निषेध किया गया है। शराब, सिगरेट, गलत संबंध न रखने से व्यक्ति स्वयं ही कई भयंकर रोगों से बच जाता है। हाल ही में किए गए शोध के अनुसार अध्यात्म हमें लंबा जीवन जीने में बहुत मदद करता है।
तनाव से मुक्त होने में अध्यात्म बहुत ही प्रभावी सिद्ध हुआ है।अध्यात्म, व्यक्ति में मृत्यु का भय समाप्त कर जीवन का आनंद प्रदान कराता है। परिणामस्वरूप धार्मिक व्यक्ति मृत्यु की विभीषिका से मुक्त रहता है। प्रत्येक धर्म शरीर को धर्म का साधन मानता है तथा शरीर की भलीभांति रक्षा करने का उपदेश देता है।अत: आध्यात्मिक लोग शरीर को ईश्वर का मंदिर समझकर उसकी रक्षा करते हैं। संगीतमय पूजन अध्यात्म व संगीत दोनों के लाभ उपलब्ध कराता है। गुरुओं के उपदेश हमें दुष्प्रवृत्ति छोड सद्प्रवृत्ति धारण कर सुखी जीवन की प्रेरणा देते हैं। वर्तमान स्थिति में संतोष रखते हुए उन्नति हेतु प्रयत्न करना, ऐसी दृष्टि हमें संतोष प्रदान कर स्वस्थ जीवन में बहुत सहायक होती है। प्रत्येक धर्म में मांस, मदिरा व गलत आचरण का निषेध किया गया है। शराब, सिगरेट, गलत संबंध न रखने से व्यक्ति स्वयं ही कई भयंकर रोगों से बच जाता है। हाल ही में किए गए शोध के अनुसार अध्यात्म हमें लंबा जीवन जीने में बहुत मदद करता है।

