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- 'एग डोनेशन' कमाई या भलाई......का काम......?
Posted by : achhiduniya
19 March 2016
आज
की जीवन शैली मे जिन दंपतियों को बच्चे नहीं हो रहे, उन्हें स्त्रीरोग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भधारण कराया जाता
है। इसमें डोनेशन से प्राप्त एग अहम भूमिका निभाते हैं। महिला या पुरुषों में कुछ
शारीरिक समस्याएं हो तो उसका इलाज संभव है। गर्भधारण के लिए जरूरी 'स्पर्म' आसानी से मिल जाते थे,लेकिन
महिलाओं के 'एग' नहीं मिल पाते थे।
लेकिन अब स्पर्म डोनर के समान ही 'एग डोनेट' करने वाली महिलाओं की संख्या बढी है। एग डोनेशन कमाई का जरिया भी बन गया है। सरोगेसी
की तुलना में एग डोनेट करना आसान और तत्काल पैसे दिलाने वाला जरिया बन गया है। बदलती जीवनशैली की वजह से बांझपन (इनफर्टिलिटी)
का प्रमाण बढ रहा है।
भारत में 18 से 35 आयु वर्ग की 10 फीसदी विवाहिताओं को बांझपन की शिकायत हैं। तनाव, मोटापा, शहरी जीवनशैली, व्यसनाधिनता आदि की वजह से बांझपन की समस्या हो रही है। बांझपन की वजह से बच्चे नहीं होते,अधिकांश मामलों में महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है। लेकिन वर्तमान में उचित समुपदेशन व उपचार से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। एग डोनर की मांग बढी है। एग प्राप्त करने के लिए 15 दिन का समय लगता है। इसमें रोजाना एक इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके लिए एक निर्धारित रकम भी दी जाती है। क्या है एग डोनेशन :- स्त्रीरोग विशेषज्ञ के अनुसार स्त्रीबीज (एग) दान करने वाली महिलाओं को पूरे 'एग डोनेशन प्रोग्राम' की जानकारी दी जाती है। पहले चरण में संबंधित महिला के खून की जांच व सोनोग्राफी की जाती है। किसी प्रकार की बीमारी न हो इसके लिए उसकी स्क्रीनिंग की जाती है।
इसके लिए मासिक प्रक्रिया शुरू होने के पहले स्त्रीबीज बढाने वाले हार्मोन्स के इंजेक्शन दिए जाते हैं। उसके बाद मासिक प्रक्रिया के चौथे दिन स्त्रीबीज निकाला जाता है। पूरी प्रक्रिया में 15 दिन लगते हैं। नियमानुसार एग डोनेट करना अपराध नहीं है। लेकिन इसे लेने के कुछ नियम हैं। साल में तीन बार एग डोनेट किया जा सकता है। महिला की उम्र 21 से 35 वर्ष होनी चाहिए। उसका खुद का एक बच्चा होना चाहिए। वह शिक्षित होनी चाहिए।
भारत में 18 से 35 आयु वर्ग की 10 फीसदी विवाहिताओं को बांझपन की शिकायत हैं। तनाव, मोटापा, शहरी जीवनशैली, व्यसनाधिनता आदि की वजह से बांझपन की समस्या हो रही है। बांझपन की वजह से बच्चे नहीं होते,अधिकांश मामलों में महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है। लेकिन वर्तमान में उचित समुपदेशन व उपचार से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। एग डोनर की मांग बढी है। एग प्राप्त करने के लिए 15 दिन का समय लगता है। इसमें रोजाना एक इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके लिए एक निर्धारित रकम भी दी जाती है। क्या है एग डोनेशन :- स्त्रीरोग विशेषज्ञ के अनुसार स्त्रीबीज (एग) दान करने वाली महिलाओं को पूरे 'एग डोनेशन प्रोग्राम' की जानकारी दी जाती है। पहले चरण में संबंधित महिला के खून की जांच व सोनोग्राफी की जाती है। किसी प्रकार की बीमारी न हो इसके लिए उसकी स्क्रीनिंग की जाती है।
इसके लिए मासिक प्रक्रिया शुरू होने के पहले स्त्रीबीज बढाने वाले हार्मोन्स के इंजेक्शन दिए जाते हैं। उसके बाद मासिक प्रक्रिया के चौथे दिन स्त्रीबीज निकाला जाता है। पूरी प्रक्रिया में 15 दिन लगते हैं। नियमानुसार एग डोनेट करना अपराध नहीं है। लेकिन इसे लेने के कुछ नियम हैं। साल में तीन बार एग डोनेट किया जा सकता है। महिला की उम्र 21 से 35 वर्ष होनी चाहिए। उसका खुद का एक बच्चा होना चाहिए। वह शिक्षित होनी चाहिए।


