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- स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बच्चो के लिए सही या गलत..........?
Posted by : achhiduniya
17 April 2016
आमतौर
पर अभिभावक अपने बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने की कोशिश करते हैं। उनकी सोच
होती है यह उनके लिए ठीक नहीं है, लेकिन आज के बदलते दौर में उन्हें अपनी सोच
बदलनी होगी। मोबाइल फोन जिस तरह बडों के लिए जरूरी है, उसी
तरह बच्चों के लिए भी। यही नहीं, इससे बच्चों में स्मार्टनेस
आती है।ताजा अध्ययनों से पता चलता है कि मोबाइल एप बच्चों को स्मार्ट बनाता है इससे
उनमें सीखने की क्षमता तेजी से बढती है। प्राथमिक पाठशाला जाने से पहले शिशु,
विद्यालय जा रहे बच्चे यदि कक्षा में मोबाइल एप का इस्तेमाल करते
हैं तो इससे उनकी सीखने की क्षमता तेजी से बढती है। प्राथमिक शिक्षा से शुरू करने
के लिए वे जल्दी तैयार हो सकते हैं। बचपन एवं प्राथमिक शिक्षा विशेषज्ञ न्यूयार्क
विश्वविद्यालय की प्राध्यापक सुसा न्यूमान के अनुसार शिक्षा के लिए विकसित किसी
मोबाइल एप के मार्गदर्शन में इस्तेमाल से बच्चों में पढाई के प्रति रुचि पैदा कर
सकते हैं।
यह शोध 10 कक्षाओं में 148 बच्चों पर किया गया। शुरुआती अध्ययन से जुडे अनेक परीक्षणों के बाद अध्ययनकर्ताओं ने पाया एप का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में स्वर विज्ञान की अच्छी समझ विकसित हो गई, जबकि अन्य तरह के एप का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में ऐसा नहीं हुआ। मुख्य शोधकर्ता न्यूमान के अनुसार, हमारे शोध का उद्देश्य यह देखना था कि क्या प्रेरणा प्रदान करने वाले एप के जरिए बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति को तेज किया जा सकता है और हमने पाया कि हां, ऐसा हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कम आयु वाले शिशु विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों में 'लर्न विद होमर' नाम के एक शैक्षिक एप के बच्चों पर प्रभाव का अध्ययन किया। तीन साल तक के 82 बच्चों और माता-पिता पर अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके मुताबिक, महज दो साल की उम्र में बच्चे मोबाइल स्वैपिंग, ऑनलॉकिंग और सर्चिंग के मास्टर बन रहे हैं।
कई तो एक साल की उम्र में ही स्मार्टफोन और टेबलेट चलाना सीख गए हैं। एप्पल के मोबाइल आईपैड पर चलने वाले एप में एक व्यवस्थित कार्यक्रम के जरिए बच्चों की ध्वनियों एवं कहानियां पढने में शामिल किया जाता है। अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि टच स्क्रीन तकनीक बच्चों के लिए फायदेमंद है। 'टच एंड फील' यानी 'छूना और अनुभव करना' बच्चों को पुराने जमाने के खेलों का अहसास करता है। आयरलैंड में कॉर्क यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के अनुसंधानकर्ताओं की यह रिपोर्ट 'आर्चिव्स ऑफ डिजिज इन चाइल्डहूड र्जनल' में प्रकाशित हुई है।
यह शोध 10 कक्षाओं में 148 बच्चों पर किया गया। शुरुआती अध्ययन से जुडे अनेक परीक्षणों के बाद अध्ययनकर्ताओं ने पाया एप का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में स्वर विज्ञान की अच्छी समझ विकसित हो गई, जबकि अन्य तरह के एप का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में ऐसा नहीं हुआ। मुख्य शोधकर्ता न्यूमान के अनुसार, हमारे शोध का उद्देश्य यह देखना था कि क्या प्रेरणा प्रदान करने वाले एप के जरिए बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति को तेज किया जा सकता है और हमने पाया कि हां, ऐसा हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कम आयु वाले शिशु विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों में 'लर्न विद होमर' नाम के एक शैक्षिक एप के बच्चों पर प्रभाव का अध्ययन किया। तीन साल तक के 82 बच्चों और माता-पिता पर अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके मुताबिक, महज दो साल की उम्र में बच्चे मोबाइल स्वैपिंग, ऑनलॉकिंग और सर्चिंग के मास्टर बन रहे हैं।
कई तो एक साल की उम्र में ही स्मार्टफोन और टेबलेट चलाना सीख गए हैं। एप्पल के मोबाइल आईपैड पर चलने वाले एप में एक व्यवस्थित कार्यक्रम के जरिए बच्चों की ध्वनियों एवं कहानियां पढने में शामिल किया जाता है। अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि टच स्क्रीन तकनीक बच्चों के लिए फायदेमंद है। 'टच एंड फील' यानी 'छूना और अनुभव करना' बच्चों को पुराने जमाने के खेलों का अहसास करता है। आयरलैंड में कॉर्क यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के अनुसंधानकर्ताओं की यह रिपोर्ट 'आर्चिव्स ऑफ डिजिज इन चाइल्डहूड र्जनल' में प्रकाशित हुई है।


