- Back to Home »
- Motivation / Positivity »
- टेंशन,तनाव को कैसे......? मैनेज करते है आप आइए सीखे कुछ बाते.........
Posted by : achhiduniya
03 April 2016
चिंता
से बचने के लिए बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। हमारा मानना है कि चिंता से बचा
नहीं जा सकता, लेकिन उसका सामना किया जा सकता है
ताकि मानसिक व जिस्मानी सेहत पर उसका प्रभाव न पडे और आपके सामाजिक रिश्ते भी खराब
न हों मगर किस तरह? तनाव से दूर रखने और उससे निकालने का
रामबाण नुस्खा है। हमेशा पाजिटिव एटीट्यूड रखें। बच्चा देर से स्कूल से आया,
चिंता हो गई। प्रेमिका वायदा करके नहीं आई, चिंता
हो गई। वेतन वृद्धि समय पर नहीं हुई, चिंता हो गई। घर वालों
से कहासुनी हो गई, चिंता हो गई। इंटरव्यू के लिए समय से
पहुंचना है, ट्रैफिक में फंस गए चिंता हो गई।
दोस्त ने वायदे पर उधार नहीं लौटाया, चिंता हो गई। कुछ है जिसकी वजह से मन उदास है, क्या है? मालूम नहीं लेकिन चिंता हो गई। दिक्कत यह कि चिंता होने का कोई एक कारण नहीं है। किसी भी बात पर, कहीं भी और किसी भी समय चिंता हो सकती है। कई बार तो आपको वजह मालूम नहीं होती और आप चिंताग्रस्त रहते हैं। ऐसे में क्या किया जाए... ? की चिंता से मुक्ती मिल सके। सबसे पहले तो आप चिंता का वास्तविक कारण ढूंढ निकालें। अक्सर वजह कुछ और होती है और समझा कुछ और जाता है। इस स्थिति से बचें। 'द एंड ऑफ स्ट्रेस एज वी नो इट' के लेखक डॉ. ब्रूस मैक्विन कहते हैं, आप से बेहतर यह कोई भी नहीं जान सकता, न तो कोई मनोचिकित्सक या परिजन कि आखिर आपकी तनाव की वजह क्या है। साथ ही यह भी आप ही जानते हैं कि आप खुशी या आनंद की अनुभूति कैसे करते हैं.....? अगर आपको मामूली सी भी बेचैनी या गुस्सा हो, तो अपनी भावनाओं की समीक्षा करके यह करें कि आपको परेशान क्या चीज कर रही है। कुछ चीजें जिन्हें आप प्रिकॉशन के तौर पर लाइफ स्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं वो हैं। हेल्दी डायट, भरपूर नींद, कम से कम या सीमित मात्रा में अल्कोहल का इस्तेमाल तथा स्मोकिंग से तौबा करे। ध्यान रखें इर्द-गिर्द, अस्त-व्यस्त माहौल, बेतरतीबी से बिखरी चीजें तथा शुरुआत करके आधे-अधूरे छोड दिए गए काम यह सारी सब चीजें हमें तनावग्रस्त करती हैं। इसलिए ऐसी स्थिति से हर हाल में बचें। अपनी मेज को व्यवस्थित रखें।
जितना काम करें, उसे पूरी तरह से करें।चिंता का सामना घुमा-फिराकर नहीं बल्कि सीधे करना चाहिए। इसके लिए अपने दायरे स्पष्ट रखें। आप खुद ही तय करें कि आपको किसी के प्यार, सपोर्ट या बढावे की कितनी जरूरत है। इससे आप तय कर पाएंगी कि आप संकोच में तनावग्रस्त न रहें। आपको जिस बात से चिंता हो उसका बुरे से बुरा नतीजा क्या हो सकता है...? इस बात को सोच लें, तो चिंता का सामना करना आसान हो जाता है। गुजरी हुई बातों के बारे में सोचें। जिन बातों की आप चिंता करते थे उनका कितना बुरा नतीजा निकला, यह सोचने से हिम्मत बढती है। जब आप गुजरी हुई बातों पर सोचेंगे, तो आपको अहसास होगा कि बुरे नतीजे उतने बुरे नहीं निकले जितनी कि आपको आशंका थी। फिर गुजरी हुई चीजों से आपने बहुत कुछ सीखा होगा। उस अनुभव से फायदा उठाएं। चुनौतियां का सामना करने की अपनी क्षमता पर विश्वास रखें। अपनी क्षमता की समीक्षा करें और ध्यान करें कि उसकी बदौलत आपने पूर्व में चुनौतियों का किस तरह से सामना किया था। उन लोगों के बारे में सोचें जिनसे आपको इस स्थिति में मदद मिल सकती है। यह जान लें कि सिर्फ चिंता करने से स्थिति में सुधार नहीं आएगा।
चिंता करने से आप उसके नतीजों को भी प्रभावित नहीं कर सकते। इसलिए चिंता छोडिए, समाधान निकालिए।स्थिति में सुधार एक्शन से ही हो सकता है इसलिए एक्शन लीजिए। आपके वश में जो कुछ है, सब कर डालें, तभी स्थिति में सुधार आएगा। तनाव से दूर रहना है तो अपने शौक जिंदा रहने दें। गौर करें कि आपके लिए कौन सी चीजें सबसे ज्यादा प्यारी हैं। फिर इन चीजों को इंज्वाय करें। सही दोस्त और न कहने की हिम्मत भी तनाव से बचाती है। मनोविद विलियम जेम्स के मुताबिक पॉजिटिव एटीट्यूड जवाब के लिए आगे पढते रहिए।
दोस्त ने वायदे पर उधार नहीं लौटाया, चिंता हो गई। कुछ है जिसकी वजह से मन उदास है, क्या है? मालूम नहीं लेकिन चिंता हो गई। दिक्कत यह कि चिंता होने का कोई एक कारण नहीं है। किसी भी बात पर, कहीं भी और किसी भी समय चिंता हो सकती है। कई बार तो आपको वजह मालूम नहीं होती और आप चिंताग्रस्त रहते हैं। ऐसे में क्या किया जाए... ? की चिंता से मुक्ती मिल सके। सबसे पहले तो आप चिंता का वास्तविक कारण ढूंढ निकालें। अक्सर वजह कुछ और होती है और समझा कुछ और जाता है। इस स्थिति से बचें। 'द एंड ऑफ स्ट्रेस एज वी नो इट' के लेखक डॉ. ब्रूस मैक्विन कहते हैं, आप से बेहतर यह कोई भी नहीं जान सकता, न तो कोई मनोचिकित्सक या परिजन कि आखिर आपकी तनाव की वजह क्या है। साथ ही यह भी आप ही जानते हैं कि आप खुशी या आनंद की अनुभूति कैसे करते हैं.....? अगर आपको मामूली सी भी बेचैनी या गुस्सा हो, तो अपनी भावनाओं की समीक्षा करके यह करें कि आपको परेशान क्या चीज कर रही है। कुछ चीजें जिन्हें आप प्रिकॉशन के तौर पर लाइफ स्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं वो हैं। हेल्दी डायट, भरपूर नींद, कम से कम या सीमित मात्रा में अल्कोहल का इस्तेमाल तथा स्मोकिंग से तौबा करे। ध्यान रखें इर्द-गिर्द, अस्त-व्यस्त माहौल, बेतरतीबी से बिखरी चीजें तथा शुरुआत करके आधे-अधूरे छोड दिए गए काम यह सारी सब चीजें हमें तनावग्रस्त करती हैं। इसलिए ऐसी स्थिति से हर हाल में बचें। अपनी मेज को व्यवस्थित रखें।
जितना काम करें, उसे पूरी तरह से करें।चिंता का सामना घुमा-फिराकर नहीं बल्कि सीधे करना चाहिए। इसके लिए अपने दायरे स्पष्ट रखें। आप खुद ही तय करें कि आपको किसी के प्यार, सपोर्ट या बढावे की कितनी जरूरत है। इससे आप तय कर पाएंगी कि आप संकोच में तनावग्रस्त न रहें। आपको जिस बात से चिंता हो उसका बुरे से बुरा नतीजा क्या हो सकता है...? इस बात को सोच लें, तो चिंता का सामना करना आसान हो जाता है। गुजरी हुई बातों के बारे में सोचें। जिन बातों की आप चिंता करते थे उनका कितना बुरा नतीजा निकला, यह सोचने से हिम्मत बढती है। जब आप गुजरी हुई बातों पर सोचेंगे, तो आपको अहसास होगा कि बुरे नतीजे उतने बुरे नहीं निकले जितनी कि आपको आशंका थी। फिर गुजरी हुई चीजों से आपने बहुत कुछ सीखा होगा। उस अनुभव से फायदा उठाएं। चुनौतियां का सामना करने की अपनी क्षमता पर विश्वास रखें। अपनी क्षमता की समीक्षा करें और ध्यान करें कि उसकी बदौलत आपने पूर्व में चुनौतियों का किस तरह से सामना किया था। उन लोगों के बारे में सोचें जिनसे आपको इस स्थिति में मदद मिल सकती है। यह जान लें कि सिर्फ चिंता करने से स्थिति में सुधार नहीं आएगा।
चिंता करने से आप उसके नतीजों को भी प्रभावित नहीं कर सकते। इसलिए चिंता छोडिए, समाधान निकालिए।स्थिति में सुधार एक्शन से ही हो सकता है इसलिए एक्शन लीजिए। आपके वश में जो कुछ है, सब कर डालें, तभी स्थिति में सुधार आएगा। तनाव से दूर रहना है तो अपने शौक जिंदा रहने दें। गौर करें कि आपके लिए कौन सी चीजें सबसे ज्यादा प्यारी हैं। फिर इन चीजों को इंज्वाय करें। सही दोस्त और न कहने की हिम्मत भी तनाव से बचाती है। मनोविद विलियम जेम्स के मुताबिक पॉजिटिव एटीट्यूड जवाब के लिए आगे पढते रहिए।



