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- गर्भपात कानून....रेप पीड़िता ने दी चुनौती…
Posted by : achhiduniya
23 July 2016
सुप्रीम
कोर्ट ने गर्भपात कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली रेप पीड़िता की याचिका
पर केंद्र एवं महाराष्ट्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी। याचिका में कानून के उन
प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो गर्भधारण के 20 सप्ताह बाद गर्भपात कराने पर रोक लगाते हैं, भले ही
मां और उसके भ्रूण को जीवन का खतरा क्यों न हो। न्यायमूर्ती जे.एस. खेहर की अध्यक्षता
वाली पीठ ने नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि वह महिला की हालत पर चिकित्सकीय बोर्ड
की रिपोर्ट मांगेगी। महिला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने
कहा कि याचिका में चिकित्सकीय गर्भपात कानून, 1971 की
संवैधानिकता को चुनौती दी गई है, क्योंकि यह गर्भपात की
अनुमति के लिए 20 सप्ताह की सीमा तय करता है।
महिला का आरोप है कि उसके पूर्व मंगेतर ने उससे शादी का झूठा वादा करके उसका रेप किया था और वह गर्भवती हो गई। महिला को गर्भधारण किए 24 सप्ताह हो गए हैं। वह एक गरीब पृष्ठभूमि से संबंध रखती है और उसका भ्रूण मस्तिष्क संबंधी जन्मजात विकृति से पीड़ित है, लेकिन चिकित्सकों ने गर्भपात करने से इनकार कर दिया। जिसके मद्देनजर गर्भपात की 20 सप्ताह की सीमा के कारण महिला के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को खतरा है। जिसके तहत उसने गर्भपात कराने की अदालत से अनुमती मांगी।
महिला का आरोप है कि उसके पूर्व मंगेतर ने उससे शादी का झूठा वादा करके उसका रेप किया था और वह गर्भवती हो गई। महिला को गर्भधारण किए 24 सप्ताह हो गए हैं। वह एक गरीब पृष्ठभूमि से संबंध रखती है और उसका भ्रूण मस्तिष्क संबंधी जन्मजात विकृति से पीड़ित है, लेकिन चिकित्सकों ने गर्भपात करने से इनकार कर दिया। जिसके मद्देनजर गर्भपात की 20 सप्ताह की सीमा के कारण महिला के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को खतरा है। जिसके तहत उसने गर्भपात कराने की अदालत से अनुमती मांगी।

