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- तलाक-ए-बिद्दत से राहत जल्दी बन सकता है संविधान के तहत कानून.....
Posted by : achhiduniya
17 December 2017
केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए विधेयक मसौदे में कहा गया है कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा
करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा हो सकती है। किसी भी स्वरूप में दिया गया ट्रिपल तलाक मौखिक, लिखित या
इलैक्ट्रॉनिक गैर कानूनी माना जाएगा। अगर किसी महिला को ट्रिपल तलाक दिया जाता है तो
वह महिला खुद और अपने नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से भरण-पोषण व गुजारा-भत्ते
की मांग कर सकती है। कितना गुजारा-भत्ता देना है यह मजिस्ट्रेट तय करेगा। नाबालिग बच्चों
की कस्टडी के लिए भी पीड़ित मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है।
ट्रिपल तलाक के खिलाफ संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले विधेयक के मसौदे पर मोदी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। बिल को संसद में पेश कर इसे बनाने के लिए दोनों सदनों से इसे पारित कराया जाएगा। यह कानून मुस्लिम महिलाओं को तुरंत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) से राहत दिलाएगा। मसौदा राज्य सरकारों के पास उनकी राय जानने के लिए भेजा जा चुका है। ये संविधान की समवर्ती सूची में है लिहाजा केंद्र सरकार इस पर कानून बना सकती है। इस विधेयक का नाम द मुस्लिम वूमेन प्रोटक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट है। संसद चाहे तो इसे पीछे की तारीख से भी लागू कर सकती है, जिससे उन महिलाओं को न्याय मिल सके जो पहले से ट्रिपल तलाक की व्यथा से गुजर रही हैं।
महिला अधिकारों की पैरोकारी करने वाले संगठन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक जकिया सोमन ने एक बयान में कहा, हम विधेयक के मसौदे के प्रावधानों का स्वागत करते हैं, लेकिन इस विधेयक में बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि ये मुद्दे भी तीन तलाक से जुड़े हुए हैं।
ट्रिपल तलाक के खिलाफ संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले विधेयक के मसौदे पर मोदी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। बिल को संसद में पेश कर इसे बनाने के लिए दोनों सदनों से इसे पारित कराया जाएगा। यह कानून मुस्लिम महिलाओं को तुरंत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) से राहत दिलाएगा। मसौदा राज्य सरकारों के पास उनकी राय जानने के लिए भेजा जा चुका है। ये संविधान की समवर्ती सूची में है लिहाजा केंद्र सरकार इस पर कानून बना सकती है। इस विधेयक का नाम द मुस्लिम वूमेन प्रोटक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट है। संसद चाहे तो इसे पीछे की तारीख से भी लागू कर सकती है, जिससे उन महिलाओं को न्याय मिल सके जो पहले से ट्रिपल तलाक की व्यथा से गुजर रही हैं।
महिला अधिकारों की पैरोकारी करने वाले संगठन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक जकिया सोमन ने एक बयान में कहा, हम विधेयक के मसौदे के प्रावधानों का स्वागत करते हैं, लेकिन इस विधेयक में बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि ये मुद्दे भी तीन तलाक से जुड़े हुए हैं।


