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- मंथ की आखिरी तारीख का न करे इंतजार....
Posted by : achhiduniya
15 December 2017
वक्त के साथ साथ अर्निंग
की क्षमता आमतौर पर घटती है,जितना आप युवावस्था में कमा सकते हैं उतना बुढ़ापे में नहीं
इसलिए, रिटायरमेंट के लिहाज से प्लानिंग जरूर करें। कोई न
कोई बीमा जरूर लें या फिर किसी न किसी एसआईपी में निवेश करें। भविष्य को ध्यान में
रखते हुए निवेश करना न भूलें। सैलरी से सबसे पहले उन खर्चों को पूरा करना चाहिए जो
कि फिक्स्ड होते हैं और जिनकी डेडलाइन होती है।
जैसे कि फोन बिल, इंटरनेट बिल, बच्चों की फीस, क्रेडिट कार्ड बिल, मकान का किराया या फिर लोन की EMI. अब आप इस खर्चे के लिए सैलरी से कितना पैसा निकालते हैं ये इस बात पर तय करता है कि कुल कितना बिल व ईएमआई आपको भरना है। ये कुल खर्चा निकालने के बाद अगले के पॉइंट्स पर गौर करें। इमर्जेंसी के लिए भी फंड रख लें। क्योंकि आपातकाल कभी भी बताकर नहीं आता। यह भी संभव है कि आपके किसी करीबी को पैसों की जरूरत पड़ जाए। साथ ही किसी प्रकार की बीमारी या दुर्घटना के लिए फंड के तौर पर एक हिस्सा सैलरी का रख लें।
कम से कम 5 फीसदी इसके नाम पर रख लें। जब फिक्स्ड खर्चे पूरे कर लें तो उसके बाद बची हुई सैलरी में से एक हिस्सा संभवत:सबसे बड़ा हिस्सा अपने प्रतिदिन के खर्चों के लिए निकाल लें। जैसे कि राशन पानी के खर्चे। किसी प्रकार की बीमारी आदि पर खर्च होने के लिए भी आपके पास फंड होना चाहिए।
जैसे कि फोन बिल, इंटरनेट बिल, बच्चों की फीस, क्रेडिट कार्ड बिल, मकान का किराया या फिर लोन की EMI. अब आप इस खर्चे के लिए सैलरी से कितना पैसा निकालते हैं ये इस बात पर तय करता है कि कुल कितना बिल व ईएमआई आपको भरना है। ये कुल खर्चा निकालने के बाद अगले के पॉइंट्स पर गौर करें। इमर्जेंसी के लिए भी फंड रख लें। क्योंकि आपातकाल कभी भी बताकर नहीं आता। यह भी संभव है कि आपके किसी करीबी को पैसों की जरूरत पड़ जाए। साथ ही किसी प्रकार की बीमारी या दुर्घटना के लिए फंड के तौर पर एक हिस्सा सैलरी का रख लें।
कम से कम 5 फीसदी इसके नाम पर रख लें। जब फिक्स्ड खर्चे पूरे कर लें तो उसके बाद बची हुई सैलरी में से एक हिस्सा संभवत:सबसे बड़ा हिस्सा अपने प्रतिदिन के खर्चों के लिए निकाल लें। जैसे कि राशन पानी के खर्चे। किसी प्रकार की बीमारी आदि पर खर्च होने के लिए भी आपके पास फंड होना चाहिए।


