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- महत्वहीन जनहित याचिका दायर करने वालों पर होगी कार्रवाई.....दिल्ली हाईकोर्ट
Posted by : achhiduniya
13 December 2017
न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील से सवाल किया कि उन्होंने
अब तक लोगों के हित से जुड़ी कितनी याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाकर्ता खुद को
सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं और सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में
मौजूद नहीं थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित अवैध निर्माण के नाम पर एक खास संपत्ति को
निशाना बनाने को लेकर एक व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि वह महत्वहीन जनहित
याचिका दायर करने वालों पर कार्रवाई करेगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल
और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा,जनहित याचिका की प्रक्रिया के दुरुपयोग और बेतुकी पीआईएल दर्ज किये जाने
की स्थिति में हम कार्रवाई करेंगे और मामले को बार काउंसिल के पास भेजेंगे। न्यायालय
ने याचिकाकर्ता के वकील से दक्षिणी दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में स्थित एक खास
संपत्ति को निशाना बनाने को लेकर सवाल किया जबकि वह पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर
इलाके में रहते हैं जहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुआ है।
पीठ ने सवाल किया, आपको यमुना पार के क्षेत्र में अवैध निर्माण नहीं दिखा या आपने आंखें बंद कर ली थी और सीधे दक्षिणी दिल्ली की ओर रुख करने का फैसला किया। नगर निगम के अधिकारियों ने जब पीठ से कहा कि वह संपत्ति के अनधिकृत हिस्से को गिराने जा रहे हैं,तो पीठ ने यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह टिप्पणी उस महिला के हस्तक्षेप के अनुरोध पर की जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने कार्रवाई की मांग की है। महिला ने यह आरोप लगाते हुए न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की थी कि याचिकाकर्ता और दो वकील उसे परेशान कर रहे हैं। महिला सरकारी कर्मचारी है। उसने दावा किया कि उसे और उसके पति को परेशान किया जा रहा है और उनके खिलाफ और भी मामले लादे जा रहे हैं।
पीठ ने सवाल किया, आपको यमुना पार के क्षेत्र में अवैध निर्माण नहीं दिखा या आपने आंखें बंद कर ली थी और सीधे दक्षिणी दिल्ली की ओर रुख करने का फैसला किया। नगर निगम के अधिकारियों ने जब पीठ से कहा कि वह संपत्ति के अनधिकृत हिस्से को गिराने जा रहे हैं,तो पीठ ने यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह टिप्पणी उस महिला के हस्तक्षेप के अनुरोध पर की जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने कार्रवाई की मांग की है। महिला ने यह आरोप लगाते हुए न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की थी कि याचिकाकर्ता और दो वकील उसे परेशान कर रहे हैं। महिला सरकारी कर्मचारी है। उसने दावा किया कि उसे और उसके पति को परेशान किया जा रहा है और उनके खिलाफ और भी मामले लादे जा रहे हैं।

