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- पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में ला सकती है सरकार.....
Posted by : achhiduniya
04 December 2017
राज्यों में विधानसभा चुनाव की उठपटक के बाद साल 2019 में लोकसभा आ जाएगे। इन चुनावों के नतीजे मुख्यतः दो फीडबैक के आधार पर तय
होंगें। पहला कि साल 2018 के राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा
की क्या परफॉर्मेंस रही और केंद्र सराकर ने जनता को सीधे प्रभावित करने वाले मुद्दों
से उन्हें कितनी राहत महसूस कराई। ऐसे में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी भी
प्रमुख कारकों में से एक होगी। इसके अलावा जीएसटी लागू होने के बाद से लगातार सरकार
उसके दायरे में आने वाली वस्तु की समीक्षा करने में लगी है। विपक्ष लगातार पेट्रोल-डीजल
को जीएसटी से बाहर रखने के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। लोकसभा चुनाव में केवल प्रधानमंत्री मोदी की परफॉर्मेंस के आधार पर भारतीय
जनता पार्टी का भविष्य तय होगा। इसके चलते पार्टी अभी से अपनी गुडविल बनाने में लगी
है। अब यही वजह है कि सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का मन बना रही
है। अगर ऐसा हुआ तो वर्तमान में लगने वाला 57 फीसद टैक्स घटकर
केवल 18 फीसदी रह जाएगा।
39 प्रतिशत का अंतर जनता के लिए बहुत बड़ी राहत होगा। पिछले लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी सरकार सबसे ज्यादा फोकस यूथ वोर्ट्स पर ही करेगी। सरकार ये कदम उठा लेती है तो ये मोदी सरकार की तरफ यूथ को सबसे बड़ा तोहफा होगा। 71 रुपए बिकने वाला पेट्रोल 38 तक हो जाएगा । अगर हम उदाहरण के तौर पर बात करें तो दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 69.24 रुपए है, जो सबसे ऊंचे स्लैब यानी 18 जीएसटी के तहत भी महज 41.68 रुपए(लगभग) होती। अगर इसे 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब में रखा गया होता तो कीमत सिर्फ 32.92 रुपए(लगभग) प्रति लीटर होगी। पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के तहत लाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है क्योंकि जीएसटी काउंसिल इसे नई व्यवस्था में शामिल कर चुकी है लेकिन टैक्स की सीमा तय नहीं की गई है।
39 प्रतिशत का अंतर जनता के लिए बहुत बड़ी राहत होगा। पिछले लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी सरकार सबसे ज्यादा फोकस यूथ वोर्ट्स पर ही करेगी। सरकार ये कदम उठा लेती है तो ये मोदी सरकार की तरफ यूथ को सबसे बड़ा तोहफा होगा। 71 रुपए बिकने वाला पेट्रोल 38 तक हो जाएगा । अगर हम उदाहरण के तौर पर बात करें तो दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 69.24 रुपए है, जो सबसे ऊंचे स्लैब यानी 18 जीएसटी के तहत भी महज 41.68 रुपए(लगभग) होती। अगर इसे 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब में रखा गया होता तो कीमत सिर्फ 32.92 रुपए(लगभग) प्रति लीटर होगी। पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के तहत लाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है क्योंकि जीएसटी काउंसिल इसे नई व्यवस्था में शामिल कर चुकी है लेकिन टैक्स की सीमा तय नहीं की गई है।

