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- न करे नजर अंदाज.....ध्यान से सुनिए दिल की बात.....
Posted by : achhiduniya
27 January 2018
अमिताभ
बच्चन जब साइंस से ग्रेजुएट हुए और एक केमिकल कंपनी में अच्छे पद पर उनकी नौकरी लग
गई तो भला कौन ऐसा रहा होगा जिसने सोचा हो कि अमिताभ गलत जगह पर हैं,लेकिन
अमिताभ गलत जगह पर थे। उन्होंने अपने तमाम साक्षात्कारों में बताया है कि 60
के दशक में उन्हें पहले ही प्रयास में एक ऐसी नौकरी मिल गई थी,
जिसमें उन्हें गाड़ी मिली
हुई थी, रसोइया मिला हुआ था और आलीशान घर भी लेकिन उनके अंदर
तो एक कलाकार बैठा था, जिसे कंपनी का एक्जीक्यूटिव बनना
मंजूर ही नहीं था। नतीजतन अमिताभ ने जल्द ही मां-बाबूजी के न चाहने के बावजूद
नौकरी छोड़ दी और आज बॉलीवुड के शहंशाह
हैं। अमिताभ जैसी मन:स्थित हम लोगों में से भी बहुतों की होती है, लेकिन हम आमतौर पर अमिताभ जैसा साहसी फैसला नहीं कर पाते।
हम यह फैसला लेने की बजाय तमाम किंतु-परंतु में अटके रहते हैं,लेकिन जो साहसी लोग होते हैं। उन्हें किंतु-परंतु की खाइयां आगे बढने से, छलांग लगाने से नहीं रोक पातीं। आगरा निवासी देवेन भारद्वाज एक सरकारी बैंक में मुलाजिम थे। नौकरी पक्की थी। प्रोन्नति तय थी। फिर भी उन्हें दस से पांच की यह नौकरी रास नहीं आ रही थी क्योंकि उनके अंदर तो एक दुस्साहसी फील्ड रिपोर्टर सांस ले रहा था। कई साल तक वह नौकरी, सुरक्षा और अपनी ख्वाहिश के बीच पुल बनाने की कोशिश करते रहे, मगर यह संभव नहीं था। अंतत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया। आज वह देश के एक बड़े न्यूज चैनल में आपदा रिपोर्टर हैं। हर उस जगह वह पूरे उत्साह के साथ सबसे पहले पहुंचते हैं, जहां कुदरत ने कहर ढाया होता है। वो कहते हैं, मैं यह निर्णय लेने में इसलिए सफल हो सका क्योंकि एक दिन मैंने अपने आपसे पूछा और कितने दिन मैं अपने आपको धोखा दूंगा। आज मैं बेहद संतुष्ट हूं। क्योकि मुझे दिन में 18-18 घंटे काम करना पड़ता है और कई बार तो सचमुच भूखे-प्यासे,लेकिन मुझे इस सबमें बहुत संतोष मिलता है क्योंकि मैं हमेशा से यह जोखिम लेना पसंद करता था। हम सबमें कुछ न कुछ हमारे बेहद निजी शौक होते हैं जो हमें खुशी देते हैं। हममें उत्तेजना भरते हैं और आसमान में उड़ने का जोश देते हैं,लेकिन हम अक्सर अपने शौकों को अपना दुश्मन समझ लेते हैं। खासकर तब जब हम किसी सुरक्षित नौकरी में हों, किसी सुरक्षित पद या पेशे में हों। इसी सुरक्षा के चलते जिंदगी भर हम अपनी खुशी के आसपास से तो निकलते हैं,लेकिन उसके आत्मीय कंधों पर अपनी बाहें नहीं डाल पाते।
जबकि दुनिया भर में ऐसे एक से एक उदाहरण मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि वास्तव में मन का करने वाले हमेशा सफल होते हैं। मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव नीता बरोना कहती हैं,'मुझे अपनी इंटीरियर की नौकरी करते हुए फैशन डिजाइनिंग के लिए हमेशा अपने अंदर लगाव दिखा। आखिरकार एक दिन मैंने इस लगाव के नजदीक गई और हिम्मत किया कि अपने लिए कुछ महीनों की छुट्टी लेने का जोखिम करूं ताकि हर हाल में नई शुरुआत कर सकूं। मुझे खुशी है कि मैंने ऐसा कर लिया। आज मैं अपने ग्राहकों की चौंका देने वाली विश्वसनीयता अजिर्त कर चुकी हूं। अंकिता महादेवन की कहानी भी कुछ-कुछ ऐसी ही हैं। उन्होंने कई लाख के अपने कामयाब केमिकल कारोबार को छोड़कर अपने शौक फैशन डिजाइनिंग को अपनाया और आज सुपर मॉम होने के साथ-साथ सुपर डिजाइनर भी हैं।
जब भी अपने काम से ऊबें, इस बात को कसौटी की तरह इस्तेमाल करें कि आखिर काम करते हुए आपको ऊब क्यों होती है? एक बार न सही पर अगर इस सवाल को आप अपने आपसे कई बार दोहराएंगे तो आपको जवाब अवश्य मिलेगा और वो जवाब यह होगा कि चूंकि आप जो काम करते हैं, वह रोजी-रोटी के लिए तो बहुत अच्छा है,लेकिन वो काम आपकी रुचि का नहीं है इसलिए वो काम हमेशा बोझ की तरह आप पर हावी रहता है और आप थके-थके रहते हैं। इसलिए अगली बार जब कुछ करने का मन करे,लेकिन किसी न किसी वजह से आपको महसूस हो कि आपके हाथ-पैर बंधे हैं तो अच्छा यही होगा एक झटके में ऐसे बंधन तोड़ दें। फिर देखें कमाल आपको एक-एक नहीं दो-दो कामयाबियां प्रतीक्षारत मिलेंगी। जब भी अपने काम से ऊबें, इस बात को कसौटी की तरह इस्तेमाल करें कि आखिर काम करते हुए आपको ऊब क्यों होती है? एक बार न सही पर अगर इस सवाल को आप अपने आपसे कई बार दोहराएंगे तो आपको जवाब अवश्य मिलेगा।
हम यह फैसला लेने की बजाय तमाम किंतु-परंतु में अटके रहते हैं,लेकिन जो साहसी लोग होते हैं। उन्हें किंतु-परंतु की खाइयां आगे बढने से, छलांग लगाने से नहीं रोक पातीं। आगरा निवासी देवेन भारद्वाज एक सरकारी बैंक में मुलाजिम थे। नौकरी पक्की थी। प्रोन्नति तय थी। फिर भी उन्हें दस से पांच की यह नौकरी रास नहीं आ रही थी क्योंकि उनके अंदर तो एक दुस्साहसी फील्ड रिपोर्टर सांस ले रहा था। कई साल तक वह नौकरी, सुरक्षा और अपनी ख्वाहिश के बीच पुल बनाने की कोशिश करते रहे, मगर यह संभव नहीं था। अंतत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया। आज वह देश के एक बड़े न्यूज चैनल में आपदा रिपोर्टर हैं। हर उस जगह वह पूरे उत्साह के साथ सबसे पहले पहुंचते हैं, जहां कुदरत ने कहर ढाया होता है। वो कहते हैं, मैं यह निर्णय लेने में इसलिए सफल हो सका क्योंकि एक दिन मैंने अपने आपसे पूछा और कितने दिन मैं अपने आपको धोखा दूंगा। आज मैं बेहद संतुष्ट हूं। क्योकि मुझे दिन में 18-18 घंटे काम करना पड़ता है और कई बार तो सचमुच भूखे-प्यासे,लेकिन मुझे इस सबमें बहुत संतोष मिलता है क्योंकि मैं हमेशा से यह जोखिम लेना पसंद करता था। हम सबमें कुछ न कुछ हमारे बेहद निजी शौक होते हैं जो हमें खुशी देते हैं। हममें उत्तेजना भरते हैं और आसमान में उड़ने का जोश देते हैं,लेकिन हम अक्सर अपने शौकों को अपना दुश्मन समझ लेते हैं। खासकर तब जब हम किसी सुरक्षित नौकरी में हों, किसी सुरक्षित पद या पेशे में हों। इसी सुरक्षा के चलते जिंदगी भर हम अपनी खुशी के आसपास से तो निकलते हैं,लेकिन उसके आत्मीय कंधों पर अपनी बाहें नहीं डाल पाते।
जबकि दुनिया भर में ऐसे एक से एक उदाहरण मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि वास्तव में मन का करने वाले हमेशा सफल होते हैं। मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव नीता बरोना कहती हैं,'मुझे अपनी इंटीरियर की नौकरी करते हुए फैशन डिजाइनिंग के लिए हमेशा अपने अंदर लगाव दिखा। आखिरकार एक दिन मैंने इस लगाव के नजदीक गई और हिम्मत किया कि अपने लिए कुछ महीनों की छुट्टी लेने का जोखिम करूं ताकि हर हाल में नई शुरुआत कर सकूं। मुझे खुशी है कि मैंने ऐसा कर लिया। आज मैं अपने ग्राहकों की चौंका देने वाली विश्वसनीयता अजिर्त कर चुकी हूं। अंकिता महादेवन की कहानी भी कुछ-कुछ ऐसी ही हैं। उन्होंने कई लाख के अपने कामयाब केमिकल कारोबार को छोड़कर अपने शौक फैशन डिजाइनिंग को अपनाया और आज सुपर मॉम होने के साथ-साथ सुपर डिजाइनर भी हैं।
जब भी अपने काम से ऊबें, इस बात को कसौटी की तरह इस्तेमाल करें कि आखिर काम करते हुए आपको ऊब क्यों होती है? एक बार न सही पर अगर इस सवाल को आप अपने आपसे कई बार दोहराएंगे तो आपको जवाब अवश्य मिलेगा और वो जवाब यह होगा कि चूंकि आप जो काम करते हैं, वह रोजी-रोटी के लिए तो बहुत अच्छा है,लेकिन वो काम आपकी रुचि का नहीं है इसलिए वो काम हमेशा बोझ की तरह आप पर हावी रहता है और आप थके-थके रहते हैं। इसलिए अगली बार जब कुछ करने का मन करे,लेकिन किसी न किसी वजह से आपको महसूस हो कि आपके हाथ-पैर बंधे हैं तो अच्छा यही होगा एक झटके में ऐसे बंधन तोड़ दें। फिर देखें कमाल आपको एक-एक नहीं दो-दो कामयाबियां प्रतीक्षारत मिलेंगी। जब भी अपने काम से ऊबें, इस बात को कसौटी की तरह इस्तेमाल करें कि आखिर काम करते हुए आपको ऊब क्यों होती है? एक बार न सही पर अगर इस सवाल को आप अपने आपसे कई बार दोहराएंगे तो आपको जवाब अवश्य मिलेगा।



