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बच्चों की सोशल मीडिया पर ज्यादा तस्वीरें या उनके विषय में टैक्स्ट शेयर करना उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है......सर्वे
Posted by : achhiduniya
27 January 2018
सोशल मीडिया पर हम अपने बच्चों की प्यारी और हमें अच्छी लगने वाली
फोटो या वीडियो क्लिक करके डाल देते हैं। यह सिलसिला एक-दो बार नहीं बार-बार
दोहराया जाता है। सोशल मीडिया जहां माता-पिता को एक ऐसा प्लेटफार्म या आउटलेट
मुहैया कराता है जिसके जरिए वे अपने बच्चों से जुड़ी अपनी फीलिंग और अपनी निजता को
दूसरों के साथ शेयर करके इसका बेहतर से बेहतर उपयोग करते हैं, दूसरी ओर वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बच्चों की सोशल मीडिया पर ज्यादा
तस्वीरें या उनके विषय में टैक्स्ट शेयर करना उनकी निजता में बड़ो द्वारा अनावश्यक
दखल तो है ही इसके अलावा यह उनकी सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
हर माता-पिता को अपने बच्चे दुनिया में सबसे अच्छे लगते हैं.
वे उनके साथ अपनी संवेदनाओं और भावनाओं को सोशल मीडिया पर शेयर भी करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों की अपनी निजी जिंदगी में दखल और उन्हें यूं बार-बार दूसरों के सामने पॉपुलर बनाने की हमारी इस प्रवृत्ति का सीमा से ज्यादा दिखावा करना उनके आने वाले जीवन के लिए कई किस्म के खतरे पैदा कर सकता है। दो साल की बच्ची नेहा ने जब गर्मी के मौसम में घर में रखे एक बड़े आम को स्वाद ले लेकर खाया तो उसकी मां ने अपने मोबाइल से फोटो लेकर उसे फेसबुक पर डाल दिया। तीन साल की एलिजा शाम के समय मम्मी के साथ जब पार्क में बैठकर आइस्क्रीम का मजा ले रही थी तो मम्मी ने उसके प्यारे से फोटो को फेसबुक पर डाल दिया। आठ महीने की इशिता की इंस्टाग्राम पिक दिखा रही है कि कल उसके बॉटम में नेपी के जो रेशेज आ गए थे, उनमें काफी सुधार हुआ है। सोशल मीडिया पर होने वाले एक सर्वेक्षण द्वारा ज्यादातर माता-पिता द्वारा अपने बच्चे की सुरक्षा और प्राइवेसी के बारे में किसी शक या संदेह की बात स्वीकार नहीं की गई।
प्रतिभागी 2/3 लोगों ने सिर्फ इस बात को स्वीकारा था कि उनके बच्चों की प्राइवेसी को शेयर करने से उन पर बुरा असर हो सकता है। उनमें 50 प्रतिशत लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि उनका बच्चा हो सकता है बड़ा होकर सोशल मीडिया पर अपने बारे में दूसरों के साथ साझा की गई जानकारी के बारे में सोचकर खुद को शर्मिंदा महसूस करे। बच्चे बड़े होकर अपने जीवन के विकास क्रम से जुड़ी अंतरंग बातों को लेकर उनसे सवाल पूछ सकते हैं। एक तिहाई लोगों ने इस सर्वेक्षण के बाद यह माना कि जो माता-पिता अपने बच्चों की निजी जिंदगी से जुड़ी छोटी-छोटी बातों को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं वे इसके द्वारा आपराधिक तत्वों को अपने बच्चे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का खुलासा तो करते ही हैं, इसके अलावा इससे बच्चों की घर में स्थिति और उनके घर की लोकेशन तथा उनकी फोटो से जुड़ी अन्य जानकारियों को लेकर उनकी सुरक्षा पर भी खतरे हो सकते हैं। हजारों, लाखों माता-पिता स्कूल सत्र की शुरुआत, गर्मियों की छुट्टियों के बाद उनका स्कूल में पहला दिन से लेकर बच्चे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी फेसबुक पर लोगों तक पहुंचाते हैं।
वे लोग जिनका जन्म 70 और 80 के दशक में हुआ है,उनके माता-पिता द्वारा उस दौर में परिवार के सदस्यों के साथ दो-चार फोटो ही खींची जाती थीं जो उनके आगे आने वाली जिंदगी में उनके बचपन के दिनों की यादगार तस्वीरें हुआ करती थीं, लेकिन अब जमाना बदल गया है। स्मार्टफोन तकनीक ने माता-पिता के लिए इंटरनेट पर हजारों फोटो अपलोड करने को बेहद सुविधाजनक बना दिया है और उन पर आने वाली दर्जनों लाइक्स भी उनके पैरेंट्स के इगो को संतुष्ट नहीं कर सकती। प्रतिवर्ष इंटरनेट पर लाखों बच्चों की गतिविधियों से जुड़ी वीडियोज माता-पिता द्वारा अपलोड की जाती हैं।सवाल है आज पैरेंट्स क्यों एक ऐसी परवरिश की शैली के आदी हो गए हैं जिसका संबंध कैमरे के लैंस से है। दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि माता-पिता जैविक रूप से मानकर चलते हैं कि उनके बच्चे इस दुनिया में सबसे ज्यादा सुंदर, स्मार्ट और टैलेंटेड हैं और ऐसे बच्चों के माता-पिता होना उनके लिए कितने सौभाग्य की बात है।
यही वजह है कि सोशल मीडिया ने उन्हें यह मौका दिया है कि वह अपने बच्चों के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताएं। हकीकत में सोशल मीडिया भी 'मैं' और अपने आप से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी अपनी फीलिंग्स को दूसरों के साथ शेयर करने का एक माध्यम है। जिसमें हर कोई सिर्फ मैं.. मैं ही करता है। जबकि यह एक ऐसा मंच है जहां मेरी अपनी नहीं बल्कि सबकी बात होनी चाहिए। सोचें जरा, एक वह दौर था जब हमारे माता-पिता हमारे जीवन से जुड़ी हर खुशी और अच्छी बातों को सिर्फ अपने बच्चों और घर परिवार के लोगों तक ही सीमित रखते थे। यह वह दौर था जब न तो बच्चे के आगमन से पहले पूरी दुनिया को जोरशोर से उनके आने की सूचना दी जाती थी, न ही उन्हें यह बताने की जरूरत थी ।
वे उनके साथ अपनी संवेदनाओं और भावनाओं को सोशल मीडिया पर शेयर भी करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों की अपनी निजी जिंदगी में दखल और उन्हें यूं बार-बार दूसरों के सामने पॉपुलर बनाने की हमारी इस प्रवृत्ति का सीमा से ज्यादा दिखावा करना उनके आने वाले जीवन के लिए कई किस्म के खतरे पैदा कर सकता है। दो साल की बच्ची नेहा ने जब गर्मी के मौसम में घर में रखे एक बड़े आम को स्वाद ले लेकर खाया तो उसकी मां ने अपने मोबाइल से फोटो लेकर उसे फेसबुक पर डाल दिया। तीन साल की एलिजा शाम के समय मम्मी के साथ जब पार्क में बैठकर आइस्क्रीम का मजा ले रही थी तो मम्मी ने उसके प्यारे से फोटो को फेसबुक पर डाल दिया। आठ महीने की इशिता की इंस्टाग्राम पिक दिखा रही है कि कल उसके बॉटम में नेपी के जो रेशेज आ गए थे, उनमें काफी सुधार हुआ है। सोशल मीडिया पर होने वाले एक सर्वेक्षण द्वारा ज्यादातर माता-पिता द्वारा अपने बच्चे की सुरक्षा और प्राइवेसी के बारे में किसी शक या संदेह की बात स्वीकार नहीं की गई।
प्रतिभागी 2/3 लोगों ने सिर्फ इस बात को स्वीकारा था कि उनके बच्चों की प्राइवेसी को शेयर करने से उन पर बुरा असर हो सकता है। उनमें 50 प्रतिशत लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि उनका बच्चा हो सकता है बड़ा होकर सोशल मीडिया पर अपने बारे में दूसरों के साथ साझा की गई जानकारी के बारे में सोचकर खुद को शर्मिंदा महसूस करे। बच्चे बड़े होकर अपने जीवन के विकास क्रम से जुड़ी अंतरंग बातों को लेकर उनसे सवाल पूछ सकते हैं। एक तिहाई लोगों ने इस सर्वेक्षण के बाद यह माना कि जो माता-पिता अपने बच्चों की निजी जिंदगी से जुड़ी छोटी-छोटी बातों को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं वे इसके द्वारा आपराधिक तत्वों को अपने बच्चे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का खुलासा तो करते ही हैं, इसके अलावा इससे बच्चों की घर में स्थिति और उनके घर की लोकेशन तथा उनकी फोटो से जुड़ी अन्य जानकारियों को लेकर उनकी सुरक्षा पर भी खतरे हो सकते हैं। हजारों, लाखों माता-पिता स्कूल सत्र की शुरुआत, गर्मियों की छुट्टियों के बाद उनका स्कूल में पहला दिन से लेकर बच्चे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी फेसबुक पर लोगों तक पहुंचाते हैं।
वे लोग जिनका जन्म 70 और 80 के दशक में हुआ है,उनके माता-पिता द्वारा उस दौर में परिवार के सदस्यों के साथ दो-चार फोटो ही खींची जाती थीं जो उनके आगे आने वाली जिंदगी में उनके बचपन के दिनों की यादगार तस्वीरें हुआ करती थीं, लेकिन अब जमाना बदल गया है। स्मार्टफोन तकनीक ने माता-पिता के लिए इंटरनेट पर हजारों फोटो अपलोड करने को बेहद सुविधाजनक बना दिया है और उन पर आने वाली दर्जनों लाइक्स भी उनके पैरेंट्स के इगो को संतुष्ट नहीं कर सकती। प्रतिवर्ष इंटरनेट पर लाखों बच्चों की गतिविधियों से जुड़ी वीडियोज माता-पिता द्वारा अपलोड की जाती हैं।सवाल है आज पैरेंट्स क्यों एक ऐसी परवरिश की शैली के आदी हो गए हैं जिसका संबंध कैमरे के लैंस से है। दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि माता-पिता जैविक रूप से मानकर चलते हैं कि उनके बच्चे इस दुनिया में सबसे ज्यादा सुंदर, स्मार्ट और टैलेंटेड हैं और ऐसे बच्चों के माता-पिता होना उनके लिए कितने सौभाग्य की बात है।
यही वजह है कि सोशल मीडिया ने उन्हें यह मौका दिया है कि वह अपने बच्चों के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताएं। हकीकत में सोशल मीडिया भी 'मैं' और अपने आप से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी अपनी फीलिंग्स को दूसरों के साथ शेयर करने का एक माध्यम है। जिसमें हर कोई सिर्फ मैं.. मैं ही करता है। जबकि यह एक ऐसा मंच है जहां मेरी अपनी नहीं बल्कि सबकी बात होनी चाहिए। सोचें जरा, एक वह दौर था जब हमारे माता-पिता हमारे जीवन से जुड़ी हर खुशी और अच्छी बातों को सिर्फ अपने बच्चों और घर परिवार के लोगों तक ही सीमित रखते थे। यह वह दौर था जब न तो बच्चे के आगमन से पहले पूरी दुनिया को जोरशोर से उनके आने की सूचना दी जाती थी, न ही उन्हें यह बताने की जरूरत थी ।




