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- क्या मनी प्लांट लगाने से सचमुच आता है मनी जाने लगाने की दिशा सही.....?
Posted by : achhiduniya
01 January 2018
नए साल से ही सभी अधिक
पैसा कमाने के बारे मे प्लान करते है,काफी समय से यह बात प्रचलित है की घर मे मनी प्लांट लगाने से घर
में धन की बढ़ोत्तरी होती है,इसीलिए हर कोई अपने घर में एक
मनी प्लांट ज़रूर लगाता है। यह पौधा घर में पॉजिटिव एनर्जी लाता है। मनी प्लांट को
सही दिशा में लगाया जाए और इसे कभी सूखने ना दें। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस
पौधे के लाभों को प्राप्त करने के लिए नियम बताएं गए हैं,लेकिन
मनी प्लांट को सही दिशा में न लगाया जाए या इसका रख-रखाव ठीक तरीके से ना किया
जाये तो ये नुकसान भी पहुंचा सकता है।
ऐसा माना जाता है कि ये पौधा जितना हरा रहेगा घर में धन की बढ़ोत्तरी उतनी ही होगी। इसे कभी भी सूखने ना दें। जब भी इसकी पत्तियां हल्की होने लगे तो फटाफट निकाल दें। हमेशा मनी प्लांट की पत्तियां ऊपर की तरफ बढ़नी चाहिए, कभी भी नीचे जमीन को नहीं छूनी चाहिए। इसीलिए आपने देखा होगा कि इस पौधे को डंडे के सहारे ऊपर बढ़ाया जाता है। मनी प्लांट को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व और पूर्व-पश्चिम दिशा में ना लगाएं। दक्षिण-पूर्व दिशा हमेशा भगवान गणेश की होती है, इसीलिए इस जगह पौधा लगाने से सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।
मनी प्लांट को कभी भी घर के बाहर ना लगाएं। मान्यता है कि इसे सिर्फ घर के अंदर लगाने से ही लाभ होता है। उत्तर-पूर्व सबसे नकारात्मक जगह होती है,इसीलिए इस जगह सिर्फ मंदिर या फिर तुलसी का पौधा ही लगाया जाता है। इसे ईशान दिशा भी कहते हैं।
ऐसा माना जाता है कि ये पौधा जितना हरा रहेगा घर में धन की बढ़ोत्तरी उतनी ही होगी। इसे कभी भी सूखने ना दें। जब भी इसकी पत्तियां हल्की होने लगे तो फटाफट निकाल दें। हमेशा मनी प्लांट की पत्तियां ऊपर की तरफ बढ़नी चाहिए, कभी भी नीचे जमीन को नहीं छूनी चाहिए। इसीलिए आपने देखा होगा कि इस पौधे को डंडे के सहारे ऊपर बढ़ाया जाता है। मनी प्लांट को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व और पूर्व-पश्चिम दिशा में ना लगाएं। दक्षिण-पूर्व दिशा हमेशा भगवान गणेश की होती है, इसीलिए इस जगह पौधा लगाने से सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।
मनी प्लांट को कभी भी घर के बाहर ना लगाएं। मान्यता है कि इसे सिर्फ घर के अंदर लगाने से ही लाभ होता है। उत्तर-पूर्व सबसे नकारात्मक जगह होती है,इसीलिए इस जगह सिर्फ मंदिर या फिर तुलसी का पौधा ही लगाया जाता है। इसे ईशान दिशा भी कहते हैं।


