- Back to Home »
- Knowledge / Science »
- पृथ्वी के अलावा चाँद और अन्य ग्रहो पर भी मनुष्य का रैन बसेरा संभव..... खगोल वैज्ञानिक
Posted by : achhiduniya
21 August 2018
यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों ने चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में पहली बार जमा हुआ पानी खोजने का दावा किया है। उनके अनुसार उन्होंने इन ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थायी परछाई वाले हिस्सों में इस जमे हुए पानी को खोजा है। उनके अनुसार यह जमा हुआ पानी मून के परछाई वाले क्षेत्रों (मून शैडो एरिया) में करीब 3.5 फीसदी हिस्से में मौजूद है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोज से बुध और मेरेस जैसे बौने ग्रहों पर भी पानी खोजने में मदद मिल सकेगी। खगोल वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पृथ्वी के अलावा सौरमंडल के बाहर दूसरे ग्रहों (एक्सोप्लेनेट) पर भी पानी के इसके प्रमुख घटक होने की संभावना है।
ये ग्रह पृथ्वी के आकार से दो से चार गुना बड़े हैं। ऐसा एक नए शोध में सामने आया है। इसका संबंध हमारे आकाशगंगा में जीवन से जुड़े खोज से हो सकता है। एक्सोप्लेनेट में पूर्व में भी पानी की मौजूदगी की बात सामने आती रही है, लेकिन इस शोध के जरिए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हमारे सौर मंडल से बाहर जल वाले ग्रह होना सामान्य है। इस शोध को गोल्डस्मिट सम्मेलन में बोस्टन, मेसाचुसेट्स में प्रस्तुत किया गया। नया शोध एक्सोप्लेनेट केपलर स्पेस टेलीस्कोप व गेइया मिशन के डाटा पर आधारित है। इसमें संकेत मिलता है कि बहुत से ज्ञात ग्रहों पर 50 फीसदी तक पानी हो सकता है, जो कि पृथ्वी के जल की मात्रा से 0.02 फीसदी (वजन से) से ज्यादा हो सकता है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता ली जेंग ने कहा,यह हैरान करने वाली बात है कि वहां इतना सारा पानी है। वैज्ञानिकों ने पाया है अब तक 4,000 एक्सोप्लेनेट खोजे गए हैं। वैज्ञानिकों ने चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों के परछाई वाले हिस्से में जमे हुए पानी या बर्फ की खोज करने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। उन्होंने इसके लिए खास सैटेलाइट के जरिये चांद के अलग-अलग हिस्सों की इमेजिंग स्कैनिंग की। इससे चांद की सतह, वहां की मिट्टी और वहां फैले खनिजों में पानी की मौजूदगी का पता चल सका। उनके अनुसार इस शोध में नियर इंफ्रारेड रिफ्लेक्टेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरएस) के जरिये चांद पर पानी होने के अखंडनीय सुबूत मिले। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के जरिये पानी को पहचाना गया।
पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा और मंगल पर भेजे गए यान के जरिए वहां की मिट्टी का अध्ययन किया गया है, जिसमें पाया गया है कि वहां पानी और हवा नहीं है। इस वजह से वहां जीवन संभव नहीं है। अब वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से दूसरे ग्रहों पर जल होने का दावा किया है। जिससे जीवन की संभावनाओ से इंकार नही किया जा सकता।



