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- सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया यह अधिकार....
Posted by : achhiduniya
14 September 2018
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
हर राज्य के DGP इस
मुद्दे पर पुलिस अफसरों व कर्मियों में जागरुकता फैलाएं और उन्हें बताया जाए कि
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर जो सिद्धान्त दिया है वो क्या है...? आपीसी की धारा 498 A दहेज प्रताड़ना मामलों में
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में गिरफ्तारी
हो या नहीं ये तय करने का अधिकार पुलिस को वापस दे दिया है। गिरफ्तारी से पहले दहेज प्रताड़ना की जांच के लिए सिविल सोसायटी की कमेटी बनाने
की गाइडलाइन को हटाया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
पति और उसके रिश्तेदारों के सरंक्षण करने के लिए जमानत के रूप में अदालत के पास
अधिकार मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट इस तरह आपराधिक मामले की जांच के
लिए सिविल कमेटी नियुक्त नहीं कर सकता, इसकी इजाजत नहीं दी
जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने दो जजों की बेंच के फैसले में संशोधन किया और कहा कि इस तरह कोर्ट कानून की खामियों को नहीं भर सकता ये कार्यपालिका द्वारा कानून लाकर ही करना संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बैलेंस बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अगर दोनों पक्षों में समझौता होता है तो कानून के मुताबिक वो हाईकोर्ट जा सकते हैं। अगर पति पक्ष कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो केस की उसी दिन सुनवाई की जा सकती है। गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CRPF की धारा 41 में गैर जमानती अपराध में गिरफ्तारी को लेकर संतुलन कायम किया गया है।
मनमानी गिरफ़्तीरी को रोकने के लिए CRPC 41 में साफ प्रावधान है कि पुलिस अगर किसी को गिरफ्तार करती है तो पर्याप्त कारण बताएगी और न गिरफ्तार करने का भी कारण बताएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में परिवार कल्याण कमिटी के फैसले को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसकी इजाजत नही दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने दो जजों की बेंच के फैसले में संशोधन किया और कहा कि इस तरह कोर्ट कानून की खामियों को नहीं भर सकता ये कार्यपालिका द्वारा कानून लाकर ही करना संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बैलेंस बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अगर दोनों पक्षों में समझौता होता है तो कानून के मुताबिक वो हाईकोर्ट जा सकते हैं। अगर पति पक्ष कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो केस की उसी दिन सुनवाई की जा सकती है। गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CRPF की धारा 41 में गैर जमानती अपराध में गिरफ्तारी को लेकर संतुलन कायम किया गया है।
मनमानी गिरफ़्तीरी को रोकने के लिए CRPC 41 में साफ प्रावधान है कि पुलिस अगर किसी को गिरफ्तार करती है तो पर्याप्त कारण बताएगी और न गिरफ्तार करने का भी कारण बताएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में परिवार कल्याण कमिटी के फैसले को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसकी इजाजत नही दी जा सकती।


