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- विपक्षी और सहयोगी दल चाहें तो मैं निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री बनूंगा.....राहुल गांधी
Posted by : achhiduniya
05 October 2018
एक अंग्रेजी अखबार के
कार्यक्रम में राहुल ने एक सवाल के जवाब कहा, विपक्षी दलो के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया
गया कि चुनाव में दो चरण की प्रक्रिया होगी। पहले चरण में हम मिलकर भाजपा को
हराएंगे। चुनाव के बाद दूसरे चरण में हम प्रधानमंत्री के बारे में फैसला करेंगे।
आगामी लोकसभा चुनाव के बाद अगर सहयोगी दल चाहेंगे तो वह जरूर प्रधानमंत्री बनेंगे।
राहुल ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुत अधिक सीटें मिलेंगी। राहुल
ने कहा, कांग्रेस सत्ता में आई तो मैं तीन काम करूंगा। पहला
काम छोटे और लघु उद्यमियों को मजबूत करूंगा। दूसरा- किसानों को यह अहसास कराउंगा
कि वे महत्वपूर्ण हैं। मेडिकल और शैक्षणिक संस्था भी बनाएंगे। राहुल ने कहा कि
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की वही स्थिति हो सकती है जो आज तेल के क्षेत्र में
सऊदी अरब की है। सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मैंने अपनी मां से बहुत कुछ सीखा है।
मेरी मां ने मुझे धैर्य सिखाया है। मैं पहले ज्यादा धैर्यवान नहीं था, लेकिन मेरी मां ने मुझे धैर्य सिखाया। राहुल ने कहा, इस सरकार और हमारी सरकार में यह बुनियादी फर्क है कि हम भारत के लोगों पर विश्वास करते थे, लेकिन मौजूदा सरकार मानती है कि सारा ज्ञान उनके पास है और वे किसी से संवाद नहीं करना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मुझे नहीं लगता है कि आप किसी एक वर्ग के बारे में सोचकर देश को विकसित कर सकते हैं। समस्या यह है कि आज विभिन्न समूहों के बीच बातचीत नहीं हो रही है। छोटे-मध्यम स्तर के कारोबारियों पर ध्यान देना होगा। हमें नौकरियां पैदा करनी होगी। कम्यूनिकेशन बढ़ाना होगा।
मेरी मां ने मुझे धैर्य सिखाया है। मैं पहले ज्यादा धैर्यवान नहीं था, लेकिन मेरी मां ने मुझे धैर्य सिखाया। राहुल ने कहा, इस सरकार और हमारी सरकार में यह बुनियादी फर्क है कि हम भारत के लोगों पर विश्वास करते थे, लेकिन मौजूदा सरकार मानती है कि सारा ज्ञान उनके पास है और वे किसी से संवाद नहीं करना चाहते हैं। नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मुझे नहीं लगता है कि आप किसी एक वर्ग के बारे में सोचकर देश को विकसित कर सकते हैं। समस्या यह है कि आज विभिन्न समूहों के बीच बातचीत नहीं हो रही है। छोटे-मध्यम स्तर के कारोबारियों पर ध्यान देना होगा। हमें नौकरियां पैदा करनी होगी। कम्यूनिकेशन बढ़ाना होगा।

