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- क्या होता ऑर्बिटल ऑस्क्यूलेशन....डॉक्टरी स्टेथेसकोप यानी आला से आँख देखना.....?
Posted by : achhiduniya
13 October 2018
अक्सर हम डॉक्टर की पहचान उनके गले–कंधे पर लटकते स्टेथेसकोप यानी आला से करते है। जिसे वो हमारे सीने या पीठ पर लगाते थे और कहते थे ज़ोर से सांस लो। बचपन से हमने स्टेथेसकोप के इस्तेमाल को ऐसे ही जाना शायद इसीलिए जब हमारे सामने कोई ऐसी तस्वीर आए, जिसमें डॉक्टर स्टेथेसकोप आंखों पर लगाए दिखें, तो थोड़ी हैरानी होती है। कुतूहल के साथ आश्चर्य होता है आइए जानते है इसके राज के बारे मे आखिर गले–कंधे पर लटकते स्टेथेसकोप यानी आला का आँख से क्या संबंध है। आपको यकीन करने में चाहे जितनी परेशानी हो, सच यही है कि बड़ी रीसर्च के बाद मरीज़ की जांच का एक ऐसा तरीका खोजा गया जिसमें सचमुच स्टेथेसकोप आंख पर लगाया जाता है। इसे कहते हैं‘ऑर्बिटल ऑस्क्यूलेशन टेकनीक। ऑर्बिट याने घेरा और ऑस्क्यूलेशन का मतलब होता है स्टेथेसकोप या किसी और तरीके से शरीर के अंदर की आवाज़ों को सुनना।
अलट्रासाउंड भी एक तरह का अस्क्यूलेशन ही है। इससे आंख की ढेर सारी बीमारियों का पता इसी तरह चलता है। खासतौर पर ऐसी, जिनमें आंख के अंदर की तरफ किसी तरह की सूजन या कोई दूसरी तकलीफ हो। कभी-कभी मरीज़ के कानों में पूरे वक्त एक आवाज़ गूंजती रहती है। इसे कहते हैं टिनिटस। ये बहुत ज़्यादा तकलीफदेह होता है। इसका कारण पता करने के लिए भी ऑर्बिटल ऑस्क्यूलेशन टेकनीक का इस्तेमाल होता है। ये जानकारी हमने अमेरिका के ‘नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन’ (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट से ली है। ये अमेरिका की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा है। आंखों की तमाम बीमारियों के लिए ऑर्बिटल ऑस्क्यूलेशन टेकनीक जैसे तरीके बड़ी रीसर्च के बाद जाकर तय किए गए।

