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- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बताया अपना गोत्र.....कौल (कश्मीरी) ब्राह्मण और दत्तात्रेय गोत्र...
Posted by : achhiduniya
26 November 2018
राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर दर्शन के बाद से बीजेपी लगातार हमलावर होते हुए राहुल से कभी उनके जनेऊधारी होने का प्रमाण मांगती रही, तो कभी गोत्र पूछने लगी। इससे पहले मध्य प्रदेश के चुनावी दौरे के दौरान बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा था, हम राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि आप जनेऊधारी हैं? आप कैसे जनेऊधारी हैं क्या गोत्र है आपका? उस वक्त राहुल ने उज्जैन में महाकाल के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की थी। राहुल गांधी जब गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे थे तो इस पर काफी चर्चा हुई।
यह भी कहा
गया कि राहुल के मंदिर में पूजा-अर्चना के बहाने कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की
राजनीति कर रही है। राहुल गांधी गुजरात चुनाव में मंदिर यात्रा के
बाद जनेऊ धारी हिंदू बने थे। फिर मानसरोवर यात्रा से शिव भक्त और अब राजस्थान
विधानसभा चुनाव 2018 में खुद के हिंदू गोत्र का
प्रमाण भी दे दिया है। पुष्कर में दर्शन करने के दौरान वहां के पुजारी ने कांग्रेस
अध्यक्ष से उनका गोत्र पूछा तो उन्होंने तुरंत इसका जवाब दिया। राहुल ने बताया कि
वह कौल (कश्मीरी) ब्राह्मण हैं और दत्तात्रेय उनका गोत्र है। इसके बाद पुजारी ने
मंदिर में पूजा संपन्न कराई। टाइम्स नाउ से बातचीत में पुजारी ने इस बात की पुष्टि
की।
पुष्कर में खुद के तीर्थ पुरोहित के जरिए राहुल ने अपना गोत्र मुल्क के सामने
रखवा दिया है। राहुल दत्तात्रेय कौल बाह्मण हैं। पुष्कर में पूजा के बाद राहुल
गांधी ने जवाब खुद मीडिया को नहीं दिया। कांग्रेस ने गांधी परिवार के पुष्कर में
तीर्थ पुरोहित राजनाथ कौल से यह जवाब दिलवाया और वह भी प्रमाण के साथ। राजनाथ कौल ने बताया कि खुद राहुल गांधी ने
उन्हें बताया कि उनका गोत्र कौल दत्तात्रेय है। राजनाथ कौल का
कहना है कि गांधी परिवार की पोथी से उन्होंने राहुल को बताया कि मोतीलाल नेहरू से
लेकर इंदिरा गांधी और उनके पिता राजीव गांधी का गोत्र कौल दत्तात्रेय ही रहा। इस
नाते उनकी दादी इंदिरा गांधी का गोत्र ही उनका गोत्र भी है। राहुल ने यह संदेश भी
दिया कि वे दिखावे के जनेऊधारी हिन्दू नहीं बल्कि वे बाह्मण कुल के जनेऊधारी हैं। राहुल
गांधी के तीर्थ पुरोहितों से जब ये पूछा गया कि उनके दादा फिरोज गांधी तो पारसी थे।
क्या दादा की जगह दादी का गोत्र हो सकता है।
कई पंडितों का कहना है पारसी समुदाय
मे पत्नी को हिंदू धर्म की तरह पति का गोत्र नहीं दिया जाता है। ऐसे में पीहर के
गोत्र का इस्तेमाल हो सकता है। इसी वजह से इंदिरा गांधी ने भी पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू का
गोत्र कौल दत्तात्रेय ही रखा,लेकिन गांधी
सरनेम और खानदान की सियासी हैसियत के चलते इस परिवार के सामने इससे पहले खुद का
गोत्र बताने की राजनीतिक मजबूरी कभी नहीं आई थी। पहले अजमेर जाकर ख्वाजा
मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाई। इसके बाद वह पुष्कर में जगतपिता
ब्रह्मा जी के मंदिर गए। इस दौरान सबसे खास यह रही कि आखिर राहुल गांधी ने अपनी
गोत्र का खुलासा कर सबको चौका दिया।



