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1400 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाला मे पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव के बाद मायावती भी ईडी के शिकंजे मे...
Posted by : achhiduniya
31 January 2019
लोक निर्माण विभाग, नोएडा प्राधिकरण और पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत वर्ष 2007 से लेकर 2012 के बीच
लखनऊ और नोएडा में पार्क और स्मारक बनवाए गए थे।
लोकायुक्त जांच में करीब 1,410 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी।
स्मारकों में लगे गुलाबी पत्थरों की सप्लाई मीरजापुर से हुई, लेकिन कागजों पर राजस्थान से दिखाई गई। मामले में विजिलेंस ने 1 जनवरी
2014 को गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आईपीसी की धारा 120बी और 409 के
तहत केस दर्ज किया गया था। मामले में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा
समेत 19 के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय मायावती शासनकाल
में हुए स्मारक घोटाले पर शिकंजा कसने की तैयारी मे है। निर्माण निगम के तत्कालीन
एमडी सीपी सिंह के लखनऊ आवास पर ईडी टीम ने छापा मारा है। इसके अलावा फर्मों और
निर्माण निगम इंजीनियरों के ठिकानों पर छापेमारी चल रही है। मायावती सरकार में
सामने आया था स्मारक घोटाला। 2007 से 2011 तक के कार्यकाल में स्मारक और मूर्तियों
के नाम पर 1400 करोड़ रुपये के मामले में प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के तहत
छापेमारी कर रही है। ईडी की यह छापेमारी लखनऊ में 6 जगह और नोएडा में चल रही है।
साल 2012 में अखिलेश सरकार बनने के बाद स्मारक घोटाले की जांच लोकायुक्त को सौंपी
गई थी। इसके बाद 2013 में लोकायुक्त ने करीब 1400 करोड़ के घोटाले की बात अपने
रिपोर्ट में कही। 2014 में विजिलेंस ने मामले में एफआईआर दर्ज करवाई। इसमें 199
लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन फिर मामला ठंडे
बस्ते में चला गया। 2017 में बीजेपी ने भी स्मारक घोटाले की जांच की बात कही। अब
एक बार फिर करीब डेढ़ साल बाद स्मारक घोटाले की ईडी ने सभी जांच एजेंसियों से 5
करोड़ से ज्यादा के घोटाले की फाइल मांगी थी।


