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- गाय-भैंस का दूध बेचा तो हुक्का-पानी बंद करने के साथ गांव से बाहर का रास्ता...
Posted by : achhiduniya
17 January 2019
उत्तर प्रदेश का मैनपुरी के अंजनी गांव एक ऐसा गांव है जहां अपनी गाय-भैंसों का दूध बेचना सख्त मना है। अगर किसी ने अपनी भैंस और गायों का दूध बेचा तो गांववाले उसका हुक्का-पानी बंद करने के साथ उसे गांव से बाहर का रास्ता दिखाते हैं। यहां घर-घर में गाय और भैसें हैं और दूध भरपूर मात्रा में होता है लेकिन इसे खुद ही इस्तेमाल करना होता है, कहीं बेच नहीं सकते हैं। गांव में दूध न बेचने के पीछे ढेर सारी कहानियां हैं जो यहां के बुजुर्ग सुनाते हैं। मैनपुरी के अंजनी गांव में 5000 से ज्यादा गाय-भैंसें हैं। इस गांव के लोगों की आबादी लगभग 3000 है लेकिन यहां आपने दूध बेचा तो देश निकाला होता है। यहां दूध की नदियां बहती हैं।
हर घर में भरपूर दूध होता है
मगर दूध बेचने पर देश निकाला की सजा होती है यानी दूध बेचा तो गांव निकाला और
हुक्का पानी बंद। 100 साल से पुरानी परंपरा को कायम रखने की जिम्मेदारी गांव के
बुजुर्गों पर है। गांव की पुष्पा देवी कहती हैं कि उनकी पड़ोसन ने कुछ दिनों पहले
चोरी-छिपे दूध को बेचा था तो उसकी भैंस बीमार पड़ गई और मर गई। उनकी सास ने भी
मरते समय यह कहा था कि कभी दूध नहीं बेचना नहीं तो भैंस मर जाएगी। 68 साल के
बुजुर्ग सियाराम ने बताया कि अगर गांव में कोई दूध बेचता है तो उसका हुक्का पानी
बंद कर दिया जाता है और गांव से निकाल दिया जाता है।
मैनपुरी के अंजनी गांव में सौ
साल पहले से चली आ रही परंपरा आज की युवा पीढ़ी के गले की फांस बन गई है। अंजनी गांव के
प्रीतम सिंह अपने बाबा के मुंह से सुनी कहानी को दोहराते हुए कहते हैं कि गांव में
300 साल पहले एक व्यक्ति ने दूध बेचा था। उसकी भैंस के थनों से खून निकलने लगा था।
इस पर गांव के लोगों ने एक बैठक बुलाई। इस बैठक में कुछ बुजुर्गों ने सुझाव दिया
कि दूध को पूत के समान दर्जा दिया जाए। गांव में गमा देवी मंदिर में बैठकर दूध ना
बेचने की सभी ने सौगंध खाई। तभी से दूध ना बेचने की परंपरा चल निकली। कई लोगों पर
चोरी छिपे दूध बेचने की बात खुलने पर उन पर जुर्माना लगाया गया और उनको गांव से
निकाल दिया गया।


