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- भारतीय बाजार मजबूत नही मजबूर है चीनी सामानों का इस्तेमाल करने के लिए..ऐसा क्यू.....?
Posted by : achhiduniya
20 March 2019
भारत देश पर चीन की दादागिरी व दबावी नीतियो के
चलते चीनी सामानो का कई बार बहिष्कार किया जाता है। भारतीय
बाजार चीन के लिए हब हैं। औसत भारतीय सुबह सोकर उठने से लेकर रात सोने तक ना जाने
कितने चीन निर्मित सामानों का इस्तेमाल करता है। दोनों देशों के बीच इस साल मार्च
2019 तक 90 बिलियन डॉलर के व्यापार की बात कही जा रही है। इसमें चीन का भारत को
निर्यात 76 बिलियन डॉलर का है। इसी से समझा जा सकता है कि भारतीय बाजार किस तरह
चीनी सामानों से पटे रहते हैं।
पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी मसूद अजहर को
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बचाने वाले चीन के प्रॉडक्ट्स के बॉयकॉट की उठ
रही मांग के बीच पड़ोसी देश की मीडिया ने भारत को चुनौती देते हुए तंज कसा है। चीन
के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री अभी
भी अविकसित है और इसमें प्रतिद्वंद्विता की क्षमता नहीं है। यही कारण है कि भारत
में 'बॉयकॉट चाइनीज प्रॉडक्ट्स'
मुहिम अब तक असफल रहा है।
कुछ भारतीय विश्लेषक मेड इन चाइना
प्रॉडक्ट्स के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। खासकर मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी
घोषित करने के प्रयास को यूएन में चीन द्वारा रोके जाने के बाद, हैशटैग बॉयकॉट चाइनीज प्रॉडक्ट्स ट्विटर पर काफी लोकप्रिय हो गया है,लेकिन इतने सालों से बॉयकॉट का प्रयास असफल क्यों रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि भारत खुद प्रॉडक्ट्स का उत्पादन नहीं कर सकता है।
इसमें
आगे कहा गया है,पसंद करें या नहीं,उन्हें
अभी भी चीन में बने सामानों का इस्तेमाल करना पड़ेगा क्योंकि अभी भी बड़े पैमाने
पर उत्पादन में भारत की क्षमता कम है। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े
अखबार ने कहा कि भारत के भीतर मौजूद ताकतें ही देश में सुधारों की प्रक्रिया को
रोक रही हैं।
पिछले दो दशकों में भारत में इंडस्ट्रीज बंद ज्यादा हुई हैं। भारत के
व्यापारियों के लिए ये ज्यादा मुफीद हो गया है कि वो बजाए भारत में सामान बनाने या
खरीदने के उसे चीन से मंगाएं। ये उनके लिए ना केवल ज्यादा मुनाफे वाला है बल्कि
काफी सस्ता भी पड़ता है।





