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- पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर के कारण चीन-अमेरिका की आपस में ठनी...
Posted by : achhiduniya
28 March 2019
अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के सहयोग से यूएन की सुरक्षा
परिषद में पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव
का ड्राफ्ट पेश किया था। अमेरिका ने यह कदम दो हफ्ते पहले चीन द्वारा मसूद को 1267
अल-कायदा प्रतिबंध कमिटी के तहत लिस्ट में शामिल करने के प्रस्ताव को होल्ड पर कर
दिया था। चीन ने अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद रोधी कमिटी के अधिकारों को
कम करने का अरोप लगाया है। चीन ने कहा कि अमेरिका मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों
की सूची में डालने का दबाव बनाकर संयुक्त राष्ट्र की आतंक विरोधी कमिटी के अधिकार
कम कर रहा है। चीन ने कहा कि अमेरिका के इस कदम से यह मुद्दा और उलझ सकता है। इस
बारे में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने मीडिया से कहा कि
वॉशिंगटन द्वारा उठाए गए इस कदम से चीजें और उलझ सकती हैं। शुआंग ने कहा कि यह
बातचीत से प्रस्ताव के समाधान की बात नहीं है।
इससे संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद
विरोधी कमिटी के अधिकारों का हनन होगा। यह देशों की एकजुटता के अनुकूल नहीं है, इससे चीजें और उलझेंगी। शुआंग ने कहा, हम अमेरिका से उम्मीद करते हैं कि वह इस ममले में
सावधानीपूर्वक आगे बढ़े और जबरन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से बचे। चीन द्वारा मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के
खिलाफ वीटो लगाने के 15 दिन पर अमेरिका ने एक रेजॉलूशन का ड्राफ्ट
तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में मसूद पर प्रतिबंध के नए तरीके के बारे में बताया
गया है। यह प्रस्ताव दुनिया के 15 सबसे
शक्तिशाली देशों को भेजा गया है। इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने
चीन द्वारा मसूद को बचाने पर एक बयान देते हुए कहा चीन अपने घर में लाखों
मुस्लिमों का शोषण कर रहा है, लेकिन एक
हिंसक इस्लामिक आतंकी संगठन के मुखिया को यूएन के प्रतिबंध से बचा रहा है। पॉम्पियो
ने एक ट्वीट कर कहा, दुनिया चीन की मुस्लिमों के प्रति पाखंड को
बर्दाश्त नहीं कर सकती है।
एक तरफ चीन लाखों मुस्लिमों का शोषण कर रहा है और दूसरी
तरफ वह एक इस्लामिक आतंकी संगठन के मुखिया को यूएन के प्रतिबंध से बचा रहा है। प्रस्ताव
के मसौदे में पुलवामा आत्मघाती हमले की आलोचना की गई है और अजहर को अल-कायदा और
इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों की प्रतिबंधित सूची में डालने की मांग की गई
है। अगर यूएन से प्रतिबंध लग जाता है तो जैश सरगना मसूद अजहर की विदेश यात्राओं पर
रोक लग जाएगी। उसकी संपत्तियां जब्त की जा सकेंगी। मसूद अजहर को ब्लैकलिस्ट करने
के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में 4 बार प्रयास हो चुके हैं। चीन ने
इनमें से 3 कोशिशों को ब्लॉक कर दिया और हालिया कोशिश पर तकनीकी आधार पर अड़ंगा
लगा दिया है, जिस वजह से प्रस्ताव 9 महीने के लिए होल्ड
पर है। अभी यह साफ नहीं है कि ड्रॉफ्ट रिजॉलूशन पर वोटिंग कब होगी, लेकिन पिछली बार की तरह चीन इस बार भी इसके खिलाफ
वीटो का इस्तेमाल कर सकता है। ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और रूस के साथ-साथ चीन सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्यों में शामिल है, जिनके पास वीटो का अधिकार है।


