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- साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का संक्षिप्त जीवन परिचय....
Posted by : achhiduniya
30 April 2019
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में स्थित भिंड
जिले में पली बढ़ीं। एक आरएसएस स्वयंसेवक और पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर की बेटी
प्रज्ञा ठाकुर की बचपन में खेलकूद में काफी रुचि थी। इतिहास में पोस्ट ग्रैजुएट 45 वर्षीय प्रज्ञा हमेशा से ही दक्षिणपंथी संगठनों
से जुड़ी रहीं। वह एबीवीपी की सक्रिय सदस्य थीं और वीएचपी की महिला विंग दुर्गा
वाहिनी से जुड़ी थीं, वह कई बार अपने भड़काऊ भाषणों के लिए
सुर्खियों में रहीं। NIA कोर्ट से मालेगांव ब्लास्ट में राहत पाने वाली साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की कहानी बाकी
लड़कियों से अलग प्रज्ञा की टॉमबॉय जैसी छवि थी।
वह जीन्स, टी-शर्ट पहनतीं, लड़कों की तरह छोटे बाल रखतीं और मोटरसाइकल चलाती
थीं। वह राह चलते छेड़छाड़ करने वाले लड़कों से भी बेधड़क जाकर भिड़ जाती थीं।
2002 में उन्होंने एक जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति बनाई। एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में उनके पिता ने एक बार कहा था कि इस संगठन ने ऐसी कई लड़कियों को बचाया है, जो दूसरे समुदाय के लड़कों के साथ भाग गई थीं। प्रज्ञा कुछ समय बाद स्वामी अवधेशानंद गिरि के संपर्क में आईं, अवधेशानंद का राजीनितिक गलियारे में खासा प्रभाव था। प्रज्ञा ने यहां एक नया अवतार लिया और खुद को साध्वी पूर्ण चेतानंद गिरि शर्मा के नाम से समाज के सामने पेश किया। इसके बाद उन्होंने एक राष्ट्रीय जागरण मंच बनाया और इस दौरान वह एमपी और गुजरात के एक शहर से दूसरे शहर जाती रहीं। प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर मोटरसाइकल ही उन्हें ATS के राडार पर लेकर आई और 2008 में महाराष्ट्र ATS ने उन्हें गिरफ्तार किया।
बाद में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ और तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर दक्षिणपंथी संगठनों ने साध्वी प्रज्ञा को बेवजह फंसाने के आरोप लगाए। आरोप है कि मालेगांव ब्लास्ट में जिस मोटरसाइकल पर बम प्लांट किया गया था वह साध्वी प्रज्ञा की ही थी। प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने साध्वी प्रज्ञा की रिहाई की मांग करते हुए काफी विरोध प्रदर्शन किया था। 2008 में राजनाथ सिंह ने प्रज्ञा की रिहाई की मांग करते हुए कहा था, अगर इस बात के सबूत मिलते हैं कि दक्षिणपंथी संगठन बम ब्लास्ट में शामिल थे, तो पुलिस को वे सबूत सामने लाने चाहिए।
बिना उसके प्रक्षा ठाकुर को आतंकी बताना पूरी तरह गलत है। प्रज्ञा ने कहा था, 'यह उसकी (हेमंत करकरे) कुटिलता थी। यह देशद्रोह था, यह धर्मविरुद्ध था। तमाम सारे प्रश्न करता था। ऐसा क्यों हुआ, वैसा क्यों हुआ? मैंने कहा मुझे क्या पता भगवान जाने। तो क्या ये सब जानने के लिए मुझे भगवान के पास जाना पड़ेगा। मैंने कहा बिल्कुल अगर आपको आवश्यकता है तो अवश्य जाइए। आपको विश्वास करने में थोड़ी तकलीफ होगी, देर लगेगी। लेकिन मैंने कहा तेरा सर्वनाश होगा।
2002 में उन्होंने एक जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति बनाई। एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में उनके पिता ने एक बार कहा था कि इस संगठन ने ऐसी कई लड़कियों को बचाया है, जो दूसरे समुदाय के लड़कों के साथ भाग गई थीं। प्रज्ञा कुछ समय बाद स्वामी अवधेशानंद गिरि के संपर्क में आईं, अवधेशानंद का राजीनितिक गलियारे में खासा प्रभाव था। प्रज्ञा ने यहां एक नया अवतार लिया और खुद को साध्वी पूर्ण चेतानंद गिरि शर्मा के नाम से समाज के सामने पेश किया। इसके बाद उन्होंने एक राष्ट्रीय जागरण मंच बनाया और इस दौरान वह एमपी और गुजरात के एक शहर से दूसरे शहर जाती रहीं। प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर मोटरसाइकल ही उन्हें ATS के राडार पर लेकर आई और 2008 में महाराष्ट्र ATS ने उन्हें गिरफ्तार किया।
बाद में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ और तत्कालीन एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर दक्षिणपंथी संगठनों ने साध्वी प्रज्ञा को बेवजह फंसाने के आरोप लगाए। आरोप है कि मालेगांव ब्लास्ट में जिस मोटरसाइकल पर बम प्लांट किया गया था वह साध्वी प्रज्ञा की ही थी। प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने साध्वी प्रज्ञा की रिहाई की मांग करते हुए काफी विरोध प्रदर्शन किया था। 2008 में राजनाथ सिंह ने प्रज्ञा की रिहाई की मांग करते हुए कहा था, अगर इस बात के सबूत मिलते हैं कि दक्षिणपंथी संगठन बम ब्लास्ट में शामिल थे, तो पुलिस को वे सबूत सामने लाने चाहिए।
बिना उसके प्रक्षा ठाकुर को आतंकी बताना पूरी तरह गलत है। प्रज्ञा ने कहा था, 'यह उसकी (हेमंत करकरे) कुटिलता थी। यह देशद्रोह था, यह धर्मविरुद्ध था। तमाम सारे प्रश्न करता था। ऐसा क्यों हुआ, वैसा क्यों हुआ? मैंने कहा मुझे क्या पता भगवान जाने। तो क्या ये सब जानने के लिए मुझे भगवान के पास जाना पड़ेगा। मैंने कहा बिल्कुल अगर आपको आवश्यकता है तो अवश्य जाइए। आपको विश्वास करने में थोड़ी तकलीफ होगी, देर लगेगी। लेकिन मैंने कहा तेरा सर्वनाश होगा।



