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- पारिवारिक मतभेद ने लगाई सपा-बसपा गठबंधन में सेंध....
Posted by : achhiduniya
27 May 2019
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सीटों के बंटवारे में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बाजी मार ली है। इस हालात को सपा के सबसे वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव भांप गए थे। यही वजह है कि उन्होंने टिकटों के गलत बंटवारे की बात कही थी। दरअसल सपा के खाते में कई सीटें ऐसी आई थीं जहां पर उसका प्रदर्शन पहले बहुत ही खराब था और सीट बंटवारे में मायावती ने वो सारी सीटें ले लीं, जहां जातीय गणित के लिहाज से जीत का भरोसा था। सपा को ऐसी कई सारी सीटें दे दी गईं, जहां सपा-बसपा का संयुक्त वोट किसी उम्मीदवार को जिताने लायक नहीं था। वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद ऐसी ही सीटें थीं।
इन सीटों पर
पहले ही माना जा रहा था कि गठबंधन प्रत्याशी नहीं जीत पाएगा। मायावती ने मन मुताबिक सीटें ले लीं। वोटों के
अदान-प्रदान के लहजे से देखें तो जिन 10 सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज की है, वहां सपा 2014 में दूसरे स्थान पर थी। इसी कारण
सपा को असफलता मिली। नगीना, बिजनौर, श्रावस्ती, गाजीपुर सीटों पर सपा के पक्ष में समीकरण थे।
दूसरा कारण गठबंधन की केमेस्ट्री जमीन तक नहीं पहुंची। सभाओं में भीड़ देखकर
इन्हें लगा कि हमारे वोट एक-दूसरे को ट्रान्सफर हो जाएंगे,लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि काफी हद तक मुलायम
सिंह यादव के परिवार के सदस्यों का आपसी टकराव भी इस मौजूदा स्थिति के लिए
जिम्मेदार है। उन्होंने कहा,शिवपाल का असर
यादव बेल्ट में खासा पड़ा।
मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद जैसे गढ़ से सपा को नुकसान उठाना पड़ा।
शिवपाल की सपा कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पैठ है। इसका खमियाजा सपा को इस चुनाव
में उठाना पड़ा। उल्लेखनीय है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाकर शिवपाल
अपने भतीजे अक्षय यादव के मुकाबले खुद मैदान में आ गए और अक्षय अपने भाजपा
प्रतिद्वंद्वी से 28,781 वोटों से हार गए। यहां शिवपाल को 91,651 वोट हासिल हुए। माना जा रहा है कि शिवपाल
मैदान में न होते तो अक्षय चुनाव जीत जाते। इसके अलावा अन्य कई सीटों पर भी
उन्होंने सपा के ही वोट काटे। शिवपाल की विधानसभा सीट जसवंतनगर क्षेत्र से भी सपा
को नुकसान हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने कांग्रेस के साथ गठबंधन
किया था, उस समय भी हार का सामना करना पड़ा था। अब
लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन काम नहीं आया।
यहीं पर मायावती को यह मालूम था कि
मुस्लिम वोटरों पर मुलायम की वजह से सपा की अच्छी पकड़ है। इसका फायदा मायावती को
हुआ। मायावती ने जीतने वाली सीटें अपने खाते में ले ली। सपा और बसपा के नेताओं ने
भले ही समझौता कर लिया हो लेकिन जमीन पर दोनों के कॉडर एक दूसरे से मिल नहीं पाए। आधी
सीटें दूसरे दल को देने से उस क्षेत्र विशेष में उस दल के जिला या ब्लाक स्तरीय नेताओं
को अपना भविष्य अंधकारमय दिखने लगा। इन सबका परिणाम यह हुआ कि सपा का वोट प्रतिशत
2014 के लोकसभा चुनाव के 22.35 प्रतिशत से घटकर इस बार 17.96 फीसदी रह गया। वोट
प्रतिशत बसपा का भी घटा, लेकिन उसके वोट सीटों में बदल गए। 2014 के
आम चुनाव में बसपा को 19.77 प्रतिशत मत मिले थे, जो इस बार
घटकर 19.26 फीसदी रह गए।



