- Back to Home »
- Religion / Social »
- राम का नाम लेने से नहीं राम का काम करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं.. मोहन भागवत ने दिए राम मंदिर निर्माण के संकेत..
राम का नाम लेने से नहीं राम का काम करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं.. मोहन भागवत ने दिए राम मंदिर निर्माण के संकेत..
Posted by : achhiduniya
27 May 2019
प्रताप गौरव केन्द्र में नवनिर्मित भक्तिधाम प्राणप्रतिष्ठा और
जन समर्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख
मोहन भागवत ने संत मुरारी बापू के रामायण प्रसंग को लेकर दिए उदाहरण का जवाब देते
हुए कही, जिसमें उन्होंने कहा कि राम का नाम लेने से
नहीं राम का काम करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। मोहन भागवत ने कहा,राम का काम करना है और वो होकर रहेगा। सबको मिलकर करना है राम का काम,राम हमारे अंदर रहते हैं। खुद का काम खुद करना
पड़ता है। सौंप देते हैं किसी को फिर भी निगरानी रखनी पड़ती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत और संत
मुरारी बापू ने महाराणा प्रताप के शौर्य, वीरता, पराक्रम और बलिदान को यादकर उनसे प्रेरणा लेने की
बात कही।
यही नहीं, दोनों ने प्रताप गौरव केन्द्र के निर्माण को
भविष्य के लिए शुभ संकेत बताया। साथ ही राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं से सिर्फ
राम नाम ही नही जपने बल्कि राम के लिए काम करने का भी आह्वान किया। इस अवसर पर
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि इतिहास कहता है कि जिस देश के लोग सजग, शीलवान, सक्रिय और
बलवान हों, उस देश का भाग्य निरंतर आगे बढ़ता है। संघ
प्रमुख ने कहा कि हमेशा चर्चा होती है कि भारत विश्वशक्ति बनेगा, लेकिन उससे पहले हमारे पास एक डर का एक डंडा
अवश्य होना चाहिये, तभी दुनिया मानेगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक
संघ के सर सहकार्यवाह संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने यहां एक बयान में यह बात
कही। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों से, स्वतंत्रता के
बाद से चली आ रही वैचारिक लड़ाई अब निर्णायक स्थिति में पहुंच गई
है। चुनाव परिणामों पर प्रसन्नता
व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि यह भारत के एक उज्जवल
भविष्य के लिए खुशी का दिन है। वैद्य ने कहा कि 2019 के आम चुनाव भारत में दो
भिन्न विचारधाराओं के बीच प्रतिद्वंद्विता का रहा है। देश में हुए आम चुनाव में
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बहुमत के साथ जोरदार वापसी के एक दिन बाद
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस साल का लोकसभा चुनाव दो अलग
अलग विचारधाराओं जीवन का हिंदू तरीका और बहिष्कार तथा विभाजन की राजनीति के बीच था।


